खानपान विवाद में खूनी संघर्ष
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के अंतर्गत आने वाले इलाके में महानवमी के पावन अवसर पर एक दुखद घटना सामने आई है। जमशेदपुर के मानगो इलाके का रहने वाला शेखर अपने एक परिचित दोस्त के साथ जियाडा भवन के नजदीक स्थापित दुर्गा पूजा पंडाल में घूमने के लिए गया हुआ था। पंडाल के भ्रमण के दौरान दोनों युवकों को भूख लगी और उन्होंने सड़क के किनारे संचालित होने वाली एक फास्ट फूड स्टॉल पर खाने का आर्डर दिया। यह घटना उस दिन की है जब पूरे देश में त्योहार का माहौल था और लोग उत्सव में व्यस्त थे। दुकान पर खाने के सामान को ग्राहकों तक पहुंचाने में काफी अधिक विलंब हो रहा था। इस देरी से नाराज होकर ग्राहक युवक ने अपना दिया गया ऑर्डर बीच में ही रद्द कर दिया। आर्डर कैंसल करने की इस छोटी सी बात को लेकर दुकान संचालक और ग्राहकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। मामूली बात से शुरू हुआ यह विवाद कुछ ही पलों में बेहद हिंसक रूप ले चुका था। दुकान चलाने वाले व्यक्ति और उसके परिजनों ने आपा खो दिया और तीखी बहस के बाद ग्राहकों पर घातक हथियारों से अचानक हमला बोल दिया। इस अचानक हुए जानलेवा हमले में धारदार चाकू का खुलकर इस्तेमाल किया गया। सड़क किनारे हुए इस खूनी संघर्ष से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे।
अस्पताल में इलाज के दौरान मौत
चाकू से किए गए इस भयानक हमले में कुल चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। खून से लथपथ इन सभी घायलों को तुरंत घटनास्थल से उठाकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया ताकि समय पर चिकित्सीय सहायता मिल सके। डॉक्टरों ने घायलों का इलाज शुरू किया लेकिन शेखर की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई थी। अस्पताल के अंदर इलाज के दौरान ही शेखर ने दम तोड़ दिया और उसकी जान बचाने में डॉक्टरों को सफलता नहीं मिली। अन्य घायलों का उपचार अभी स्थानीय अस्पताल में चल रहा है जहाँ उनकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद फौरन एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया। तूरंत छानबीन शुरू की गई और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए ताकि दोषियों के गिरेबान तक पहुंचा जा सके। पुलिस टीम ने तेजी से तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों को जुटाया और आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई ठिकानों पर दबिश दी। इस मामले में पुलिस ने अपनी तफ्तीश के दौरान एक ही परिवार के पांच लोगों को नामजद करते हुए हिरासत में ले लिया। पकड़े गए सभी आरोपियों से पूछताछ पूरी करने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया गया जहां से न्यायालय के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है।
गिरफ्तारी और आगे की कार्रवाई
पुलिस अनुसंधान के दौरान इस जघन्य अपराध में संलिप्त पाए गए परिवार के सभी सदस्यों के नाम सामने आ गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए मुख्य आरोपी का नाम ऋषभ बरुआ है। इसके अलावा उसके भाई मोहित बरुआ को भी इस मामले में दबोच लिया गया है। इस पूरे परिवार के मुखिया मोहन बरुआ को भी पुलिस ने शिकंजे में ले लिया है। आरोपियों की सूची में मां ऋषिका बरुआ और बहन मुक्ति बरुआ का नाम भी शामिल है जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक ही परिवार के इन पांचों सदस्यों पर एक युवक की हत्या और चार अन्य लोगों को गंभीर रूप से घायल करने का सीधा आरोप है। त्योहार के दिन इस तरह की हिंसक वारदात सामने आने से स्थानीय निवासियों में भारी रोष और डर का माहौल व्याप्त है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल को इलाके में तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस अब इस मामले में साक्ष्यों को मजबूत करने में जुटी है ताकि अदालत में दोषियों के खिलाफ पुख्ता चार्जशीट दाखिल की जा सके। त्योहार के माहौल में इस छोटी सी बात पर हुई हत्या ने पूरे इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि कानून के मुताबिक सभी आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।