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बढ़ती चिंता: नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों को लेकर मंडराया GLOF का खतरा

नेपाल में हाल ही में सामने आई प्राकृतिक आपदा के बाद अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ (GLOF) के खतरे को लेकर चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। अधिकारियों और पर्यावरणविदों द्वारा स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

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Ankit Yadav
01 सित 2026, 20:08
बढ़ती चिंता: नेपाल की आपदा के बाद उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों को लेकर मंडराया GLOF का खतरा
हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर झीलों के फटने से हुई तबाही और भारी नुकसान के बाद, अब भारतीय पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे सतर्क हो गए हैं। इस आपदा के बाद से विशेष रूप से उत्तराखंड राज्य में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी जीएलओएफ को लेकर चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गई हैं। पर्वतीय भूभाग और नदियों के किनारों पर बसने वाली बस्तियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नेपाल की घटना से सबक

स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों ने नेपाल की इस हालिया घटना के बाद अपनी तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से पहाड़ी इलाकों में बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे ऊंचाई पर स्थित झीलों में पानी का स्तर खतरनाक सीमा तक पहुंच जाता है। जब इन झीलों के प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाते हैं, तो नीचे की घाटियों में भीषण बाढ़ आ जाती है, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही मच सकती है। नेपाल में हुई इसी तरह की घटना ने एक बार फिर पूरे हिमालयी बेल्ट में इस खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है। उत्तराखंड राज्य के कई जिले भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। यहां पहले भी जलप्रलय जैसी स्थिति का सामना करना पड़ चुका है, जिसने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान किया था। राज्य के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई ऐसी संवेदनशील ग्लेशियर झीलें हैं जिन पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते यदि इन झीलों के जलस्तर का प्रबंधन और मॉनिटरिंग नहीं की गई, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

प्रशासन और विशेषज्ञों की तैयारी

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार और विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों ने आपसी तालमेल बढ़ाकर निगरानी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उपग्रह चित्रों और आधुनिक तकनीकी माध्यमों से इन झीलों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। इसके अलावा, स्थानीय निवासियों और पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को भी जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने पर विचार किया जा रहा है ताकि आपदा की स्थिति में त्वरित बचाव और राहत कार्यों को सफलतापूवर्क अंजाम दिया जा सके।
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