कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      स्पीकर ओम बिरला की दो टूक, अगर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का प्रस्ताव...      'शिमला में भुट्टो से मिली थीं इंदिरा', रूबियो से मुंबई में मिलने के विवाद पर बोले जयशंकर      सऊदी अरब में बांग्लादेशी महिला कामगार कितनी सुरक्षित हैं?      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      "ट्रंप के बयान बेतुके और अस्वीकार्य": मैक्रों ने फ्रांस में दंगों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान पर किया पलटवार      ज्ञानेश कुमार पर आर-पार, इस बार बीजेपी भी तैयार... SIR पर आज फिर छिड़ेगा संग्राम!      दिल्‍ली नगर निगम में विकास निधि-प्रदूषण पर AAP का हंगामा, पार्षदों में हाथापाई की नौबत; मेयर को सुरक्षित निकाला     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
देश

बिहार का शोक: नेपाल से भारत आने वाली प्रमुख नदियां और उनका देश पर असर

नेपाल से निकलकर भारत में प्रवेश करने वाली प्रमुख नदियों और उनके देश पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों पर एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कोसी नदी के इतिहास और उसके 'बिहार के शोक' के रूप में जाने जाने के कारणों का जिक्र किया गया है।

A
Ankit Yadav
01 सित 2026, 20:14
बिहार का शोक: नेपाल से भारत आने वाली प्रमुख नदियां और उनका देश पर असर
नेपाल और भारत के बीच भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाले कई जलस्रोत प्राकृतिक रूप से भारतीय मैदानी इलाकों में बहते हैं। पड़ोसी देश नेपाल से कई बड़ी और छोटी नदियां प्रवाहित होकर भारत की सीमा में दाखिल होती हैं। इन जलधाराओं का भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि और पर्यावरण पर एक बहुत बड़ा और व्यापक असर देखने को मिलता है। मानसून के मौसम में जब इन जलधाराओं में उफान आता है, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में हालात काफी चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं, जिससे लाखों लोगों का जनजीवन सीधे तौर पर प्रभावित होता है।

कोसी नदी का इतिहास और उसका प्रभाव

इन तमाम जलधाराओं में कोसी नदी का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी अप्रत्याशित धारा परिवर्तन की प्रवृत्ति और भयंकर बाढ़ के कारण कोसी को ऐतिहासिक रूप से 'बिहार का शोक' कहा जाता है। जब भी ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी मानसूनी वर्षा होती है, तो यह नदी अपने साथ भारी मात्रा में गाद और मलबा लेकर नीचे उतरती है। इसके परिणामस्वरूप जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाता है और नदी अपने पुराने रास्ते को छोड़कर नए क्षेत्रों में तबाही मचाने लगती है। इस विनाशकारी रवैये के कारण राज्य के उत्तरी हिस्से में हर साल भारी पैमाने पर जान-माल का नुकसान होता है, जिससे कृषि योग्य भूमि और बस्तियां जलमग्न हो जाती हैं।

अन्य प्रमुख नदियां और जल प्रबंधन

कोसी के अलावा गंडक, महानंदा और घाघरा जैसी अन्य महत्वपूर्ण नदियां भी नेपाल से भारतीय राज्यों में प्रवेश करती हैं। इन सभी जलधाराओं का सामूहिक रूप से देश की भौगोलिक और कृषि संबंधी रूपरेखा पर गहरा असर पड़ता है। जहां एक ओर ये जलस्रोत मैदानी इलाकों की मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और सिंचाई के लिए आवश्यक पानी प्रदान करते हैं, वहीं दूसरी ओर जल प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने पर ये गंभीर संकट का कारण भी बन जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बेहतर समन्वय और मजबूत बाढ़ नियंत्रण प्रणालियों के विकास से ही इस समस्या से स्थायी रूप से निपटा जा सकता है। भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और नेपाल के बीच कई स्तरों पर बातचीत और संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं। तटबंधों को मजबूत करना, समय पर पानी के डिस्चार्ज की सूचना साझा करना और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी तंत्र स्थापित करना इस दिशा में उठाए जा रहे मुख्य कदम हैं। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन इकाइयां भी हर साल बरसात के मौसम से पहले पूरी तरह सतर्क रहती हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके और प्रभावित इलाकों में समय रहते राहत पहुंचाई जा सके।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज