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आध्यात्मिक रहस्य: महादेव ने मां जगदंबा के लिए रची थी पूरी काशी नगरी

वाराणसी में नवरात्रि के पावन अवसर पर शक्ति आराधना का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव ने मां जगदंबा के लिए इस नगरी की रचना की थी।

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Ankit Yadav
21 अक्ट 2026, 12:18
आध्यात्मिक रहस्य: महादेव ने मां जगदंबा के लिए रची थी पूरी काशी नगरी

काशी में शक्ति के नौ रूपों और महाविद्याओं का वास

वाराणसी शहर को लेकर यह बड़ी मान्यता है कि भगवान शिव ने मां जगदंबा की इच्छा पूरी करने के लिए इस पावन क्षेत्र का निर्माण किया था। शास्त्रों के अनुसार यह दुनिया का इकलौता ऐसा शहर है जहां माता दुर्गा के सभी नौ रूप पूरी तरह से विराजमान हैं। इसके साथ ही इस पावन नगरी में नौ गौरियां और दस महाविद्याएं भी पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित हैं। माता दुर्गा यहां स्वयं एक शक्तिपीठ के रूप में साक्षात मौजूद हैं। काशीपुराधिपति कहे जाने वाले शिव की इस नगरी में सभी देवी-देवताओं के साथ मां जगदंबा को सबसे ऊंचा स्थान प्राप्त है। यहां की धार्मिक परंपराओं में इस बात का विशेष उल्लेख मिलता है कि माता के बिना शिव की आराधना कभी पूरी नहीं हो सकती है। काशी के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित पवन त्रिपाठी का कहना है कि शिव के इस नगर में शक्ति की उपासना को हमेशा से ही सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब माता कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के साथ निवास करती थीं तब उन्होंने अपनी ससुराल की इच्छा व्यक्त की थी। इसके बाद महादेव ने अपने त्रिशूल पर इस नगर की रचना की थी जिसे आनंद कानन नाम दिया गया था। इसी स्थान पर मां जगदंबा अपने सभी सहचर रूपों और देवियों के साथ हमेशा के लिए विराजमान हो गईं। स्वयंभू रूप में मौजूद इन देवियों के दर्शन के लिए देश भर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं।

विश्वंभर रूप में याचक मुद्रा में नजर आते हैं महादेव

काशी की इस अद्भुत नगरी में देवी और देवताओं के आपसी संबंध का एक अनूठा रूप देखने को मिलता है। यहां पर भगवान विश्वंभर भी एक याचक की मुद्रा में खड़े नजर आते हैं। वे सृष्टि के सुचारू संचालन के लिए मां जगदंबा से भिक्षा मांगते हुए दिखाई देते हैं। यह दृश्य इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि इस स्थान पर शक्ति की उपासना का कितना बड़ा महत्व है। शास्त्रों में भी इस बात को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संपूर्ण जगत शक्ति के द्वारा ही सृजित और संचालित होता है। प्रलय के समय भी सब कुछ उसी शक्ति में समाहित हो जाता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वेद विभाग के एक प्रोफेसर के अनुसार इस पवित्र शब्द का अर्थ ही ब्रह्म विद्या का प्रकाश है। जीवन के पुरुषार्थ को हम सब भगवती का ही स्वरूप मानते हैं जो इस भवसागर की नैया को आसानी से पार लगाती हैं। सृष्टि को चलाने वाली पांच प्रमुख शक्तियां इस स्थान पर पूरी तरह से मौजूद हैं। इनमें गणेश की जननी मां दुर्गा के साथ राधा, लक्ष्मी, सरस्वती और सावित्री के रूप शामिल हैं। ये सभी देवियां भवानी के रूप में इस नगरी में संपूर्ण रूप से निवास करती हैं। इन सभी देवियों के अलग-अलग रूप जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि और सिद्धिदात्री के रूप में पूजे जाते हैं। इन देवियों के ठीक सामने भैरव शिव के रूप में हमेशा मौजूद रहते हैं जो इनकी रक्षा करने का कार्य करते हैं। इस प्रकार काशी की पूरी व्यवस्था इन शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है और नवरात्रि के इन पावन दिनों में यहां की रौनक देखते ही बनती है।

विशालाक्षी शक्तिपीठ और अन्नपूर्णा मंदिर की विशेष मान्यता

वाराणसी के इस ऐतिहासिक नगर में शक्तिपीठ का भी एक विशेष और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां पर मां जगदंबा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थित है जहां माता विशालाक्षी अपने गौरी मुख स्वरूप में विराजमान हैं। शक्तिपीठ के महंत सूरज तिवारी बताते हैं कि यहां मां का मुख गिरा हुआ था जिसके कारण इन्हें गौरी मुख के रूप में पूजा जाता है। देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आने वाले भक्त यहां आकर माता के दर्शन और पूजन का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। माता को कुमकुम अर्पित करने की परंपरा का यहां बहुत अधिक महत्व बताया गया है। इसके अलावा मां अन्नपूर्णा के मठ मंदिर के महंत स्वामी शंकर पुरी महाराज का कहना है कि श्रीमद् देवीभागवत् में भगवती ने स्वयं इस बात की घोषणा की है। उनके अनुसार इस संपूर्ण जगत में उनके अलावा अन्य कोई भी परम सत्य या सनातन तत्व मौजूद नहीं है। स्वयं महादेव भी इस बात को स्वीकार करते हैं और मां अन्नपूर्णा के सामने एक याचक के रूप में खड़े नजर आते हैं। मां अन्नपूर्णा उन्हें सृष्टि के पालन के लिए अपना आशीर्वाद प्रदान करती हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान बाबा विश्वनाथ के दरबार से मां के लिए विशेष श्रृंगार भेजा जाता है। मंदिर में कलश की स्थापना करके विशेष रूप से मां की आराधना की जाती है। इन विशेष दिनों में देवी की आराधना करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल और लाभ प्राप्त होता है।

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