कंटाप
NEWS
शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
जो US लगा रहा था एक्स्ट्रा टैरिफ, अब वही पढ़ रहा कसीदे; भारत की तेल आयात नीति पर क्या बोले मार्को रुबियो      ‘उतनी तो श्रीहरिकोटा से लॉन्चिंग नहीं होती जितनी...', PM मोदी ने कांग्रेस पर कसा जोरदार तंज; जानें और क्या      फ़्रांस के राष्ट्रपति विदेशी नेताओं पर भड़के, 'इस्लामी और प्रवासी भीड़' के आरोप पर दिया जवाब      असम सरकार का बड़ा फैसला, रिटायरमेंट से 1 साल पहले शुरू होगी पेंशन की प्रक्रिया      टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: कोर्ट में फूट-फूटकर रोई राधा, अब पुलिस उगलवाएगी राज      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      कौन हैं निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर जो प्रकाश राज और अभिजीत दिपके साथ CJP का प्रदर्शन में शामिल होंगे      ‘भारत हम सभी के लिए उम्मीद की किरण’, पोलैंड के प्रधानमंत्री ने की PM मोदी की जमकर तारीफ     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
धर्म

अहिंसा और संयम: प्रतापगढ में जैन धर्म का पर्यूषण महापर्व शुरू, विश्व शांति की कामना

जैन धर्म के अनुयायियों के सबसे बड़े पर्वों में शुमार पर्यूषण महापर्व की शुरुआत प्रतापगढ़ में हो चुकी है। इस दौरान आत्म-शुद्धि, क्षमावाणी और विश्व शांति के लिए विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं.

A
Ankit Yadav
17 सित 2026, 13:39
अहिंसा और संयम: प्रतापगढ में जैन धर्म का पर्यूषण महापर्व शुरू, विश्व शांति की कामना
देशभर के साथ-साथ प्रतापगढ़ में भी जैन समुदाय के भीतर अत्यंत उत्साह और श्रद्धा के साथ पर्यूषण महापर्व का शुभारंभ हो गया है। जैन धर्म में इस पर्व को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है, जो साल में एक बार आता है। इस दौरान श्रावक और श्राविकाएं आत्म-संयम, साधना, और तपस्या के मार्ग पर चलते हुए अपने भीतर की बुराइयों और विकारों को दूर करने का प्रयास करते हैं। पर्व के पहले दिन से ही स्थानीय जिनालयों और मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और प्रवचन कार्यक्रमों का सिलसिला प्रारंभ हो गया है, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग भाग ले रहे हैं।

आत्म-शुद्धि और क्षमावाणी का विशेष महत्व

इस महापर्व का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के भीतर छिपे अहंकार, क्रोध और मोह को समाप्त कर उसे क्षमा और करुणा के मार्ग पर लाना है। इन दिनों में उपवास, सात्विक जीवन शैली और ध्यान का विशेष महत्व होता है। जैन संत और विद्वान अपने प्रवचनों के माध्यम से लोगों को भगवान महावीर के अहिंसा परमो धर्म के संदेश को जीवन में उतारने की प्रेरणा दे रहे हैं। पर्यूषण के दौरान लोग न केवल अपने परिवार और समाज के कल्याण की कामना करते हैं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड में शांति, सद्भाव और भाईचारे का वातावरण बना रहे, इसके लिए भी विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं।

धार्मिक आयोजनों से गूंज उठे जिनालय

प्रतापगढ़ के विभिन्न जैन मंदिरों में इन दिनों सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। मंदिरों को बेहद सुंदर ढंग से सजाया गया है और प्रतिदिन होने वाली अष्टप्रकारी पूजा तथा स्वाध्याय कार्यक्रमों में लोगों का भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार इस духов साधना में तल्लीन नजर आ रहे हैं। पर्यूषण पर्व के इन आठ या दस दिनों के दौरान जैन समाज के लोग विभिन्न प्रकार के तप और व्रत का अनुष्ठान करते हैं, जो उनके आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है।

क्षमादान और आपसी मेल-मिलाप का पर्व

इस महापर्व का समापन क्षमावाणी पर्व के साथ होता है, जिसमें सभी लोग जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगते हैं और अपने मन के सारे द्वेष भाव को मिटाकर एक नई शुरुआत करते हैं। प्रतापगढ़ में इस बार भी इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग इस धार्मिक उत्सव का लाभ उठा सके। आयोजकों का मानना है कि ऐसे पवित्र अनुष्ठान समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़े रखते हैं।
कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज