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बड़ा फैसला: देश के 52 मंदिरों में स्मार्टफोन ले जाने पर लगा प्रतिबंध, प्रवेश द्वार पर जमा करने होंगे केवल पांच रुपये
देशभर के धार्मिक स्थलों और मंदिरों की पवित्रता एवं अनुशासन को बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब विभिन्न क्षेत्रों के कुल 52 मंदिरों के परिसरों के भीतर स्मार्टफोन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसके तहत भक्तों को मंदिर में प्रवेश करने से पहले अपने मोबाइल फोन बाहर सुरक्षित जमा कराने होंगे।
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Ankit Yadav
02 सित 2026, 14:21
आज के डिजिटल युग में जहां हर व्यक्ति के हाथ में मोबाइल फोन और स्मार्टफोन आम बात हो गई है, वहीं धार्मिक संस्थानों में इसका अत्यधिक उपयोग कई बार गंभीर चिंता का विषय बन जाता है। लोग मंदिरों के गर्भगृह और पवित्र स्थलों के भीतर तस्वीरें खींचने या सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं, जिससे पूजा-अर्चना में बाधा आती है और अन्य श्रद्धालुओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, देश के कुल 52 प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन ने एक सख्त और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इन सभी मंदिरों के अंदर अब किसी भी श्रद्धालु या आगंतुक को स्मार्टफोन ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सुरक्षा और व्यवस्था के लिए सख्त नियम
मंदिर प्रशासनों द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य धार्मिक स्थलों पर शांति, अनुशासन और गोपनीयता को बनाए रखना है। कई बार लोग अनजाने में या जानबूझकर उन हिस्सों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर लेते हैं जहाँ वीडियोग्राफी प्रतिबंधित होती है। इस नए आदेश के लागू होने के बाद, मंदिर परिसरों में पूरी तरह से आध्यात्मिक वातावरण बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से न केवल सुरक्षा प्रबंध मजबूत होंगे, बल्कि भक्त बिना किसी व्यवधान के पूरी श्रद्धा और ध्यान के साथ भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इस प्रकार के नियमों की मांग लंबे समय से पारंपरिक और धार्मिक संगठनों द्वारा की जा रही थी।
प्रवेश द्वार पर मोबाइल जमा करने की क्या है प्रक्रिया?
मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश द्वारों के पास ही सुरक्षित लॉकर और काउंटर बनाए गए हैं। इन काउंटरों पर भक्त अपने स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स को बेहद आसानी से और सुरक्षित रूप से जमा करवा सकते हैं। इसके लिए मंदिर प्रबंधन द्वारा मात्र 5 रुपये प्रति फोन शुल्क निर्धारित किया गया है, जो कि बहुत ही मामूली और किफायती है ताकि हर वर्ग का श्रद्धालु इसका लाभ उठा सके। फोन जमा करने के बाद श्रद्धालुओं को एक टोकन दिया जाता है, जिससे दर्शन समाप्त होने के बाद वे बिना किसी परेशानी के अपना फोन वापस प्राप्त कर सकते हैं। इस व्यवस्था से काउंटर के संचालन का खर्च भी निकल जाता है और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो जाती है।
भक्तों की मिलीजुली प्रतिक्रिया और आगे के कदम
इस नए प्रतिबंध पर देश भर के श्रद्धालुओं की तरफ से मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों और पारंपरिक विचारों वाले लोगों ने इस कदम की जमकर सराहना की है, उनका कहना है कि इससे मंदिरों की गरिमा और पवित्रता पर आंच नहीं आएगी। वहीं, कुछ युवा वर्ग के लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों को शुरुआती दौर में थोड़ी असुविधा जरूर हो रही है, क्योंकि वे अपनी यात्रा की यादें कैद करने के आदी होते हैं। हालांकि, व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के बाद अब लोग भी इसका समर्थन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों के मंदिर भी इस तरह के कड़े नियम अपने परिसरों में लागू करने पर विचार कर सकते हैं, ताकि धार्मिक पर्यटन स्थलों पर अनुशासन और मर्यादा का स्तर ऊंचा बना रहे।