देवीपाटन में सप्तमी पर भक्तों की भीड़
शारदीय नवरात्र के सातवें दिन देवीपाटन शक्तिपीठ में आस्थावान लोगों का तांता लगा रहा। सप्तमी तिथि को देवी के कालरात्रि स्वरूप की आराधना का दिन माना जाता है, जो अपने भक्तों को भयमुक्त करने और सभी दुखों को मिटाने वाली शक्ति मानी जाती हैं। मंदिर परिसर और वहां आयोजित होने वाले पंद्रह दिवसीय राजकीय मेले के कारण पूरे क्षेत्र में उत्सव का वातावरण बना हुआ है। नेपाल की सीमाओं से सटी हुई भौगोलिक स्थिति और मां पाटेश्वरी के प्रति गहरी श्रद्धा के चलते काफी संख्या में श्रद्धालु वहां दर्शन करने आए हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर के प्रवेश द्वारों पर लोगों की कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मंदिर प्रांगण की गलियों और मुख्य मार्गों पर भक्तों के आने का सिलसिला जारी है। दूर-दराज से आए भक्त अपने परिवारों की शांति और उन्नति के लिए देवी के सामने शीश नवा रहे हैं। पूरा परिवेश भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारण के स्वर से गुंजायमान है, जिससे वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और भी बढ़ गई है।
सुरक्षा और सुगम दर्शन के इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी आमद को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन और सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क दिखाई दे रहे हैं। मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर आवागमन के सभी प्रमुख रास्तों पर पुलिसकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके। दर्शनार्थियों की भारी भीड़ के मद्देनजर प्रशासन ने कतारबद्ध प्रणाली अपनाई है, जिससे दर्शन में किसी प्रकार का व्यवधान न आए। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं ताकि दर्शन प्रक्रिया पूरी तरह सुचारू रहे। दर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति को असुविधा का सामना न करना पड़े, इस बात को प्राथमिकता दी गई है। मंदिर परिसर के आसपास मेला क्षेत्र में भी पुलिस का कड़ा पहरा है। अधिकारियों का जोर इस बात पर है कि मां पाटेश्वरी के दर्शन हेतु आने वाले हर श्रद्धालु को व्यवस्थित तरीके से प्रवेश मिले। सुरक्षा प्रबंधों के साथ ही प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष रूप से सतर्कता बरती है ताकि शांति व्यवस्था भंग न हो।
सूर्यकुंड में अनुष्ठान और मंदिर का महत्व
देवीपाटन मंदिर के ठीक निकट स्थित सूर्यकुंड का भी इस धार्मिक उत्सव में विशेष योगदान है। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने से पहले सूर्यकुंड में आस्था की डुबकी लगाकर धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं। सुबह से ही स्नान करने वालों और पूजा-अर्चना करने वालों की आवाजाही निरंतर बनी हुई है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर यहां की आध्यात्मिक महत्ता श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। देवीपाटन न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह आस्था का एक बड़ा केंद्र भी है, जहां भक्त परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर आते हैं। मंदिर के भीतर मां के सातवें रूप की पूजा को काफी महत्व दिया गया है और इसी कारण सप्तमी के दिन परिसर पूरी तरह से भक्तिमय नजर आया। प्रशासन और प्रबंधन द्वारा किए गए पुख्ता इंतजामों के चलते भक्त शांतिपूर्ण ढंग से अपनी पूजा विधि पूरी कर रहे हैं। यह पंद्रह दिवसीय राजकीय मेला श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का मुख्य बिंदु बना हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर भी भक्ति भाव काफी मुखर है। भक्तों का विश्वास है कि इस तिथि पर दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।