इन्हौना में हुई बैठक और पदाधिकारियों का चयन अमेठी के अंतर्गत आने वाले इन्हौना कस्बे में स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों की एक आवश्यक बैठक बुलाई गई जिसका मुख्य उद्देश्य आगामी पर्व के मद्देनजर व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करना था। इस महत्वपूर्ण सभा के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए केंद्रीय दुर्गा पूजा कमेटी का आधिकारिक तौर पर पुनर्गठन किया गया। उपस्थित सदस्यों के आपसी विचार-विमर्श के बाद श्रवण गुप्ता को इस कमेटी का नया अध्यक्ष चुना गया। इस चयन के साथ ही संगठन को और अधिक मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में पहला कदम उठाया गया ताकि आने वाले दिनों में उत्सव से जुड़ी सभी प्रशासनिक और साजो-सामान की आवश्यकताओं को समय रहते पूरा किया जा सके। बैठक में शामिल अन्य सदस्यों ने भी नए नेतृत्व पर अपनी सहमति जताते हुए संगठन को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा और परंपरा का महत्व भारतीय संस्कृति में इस प्रकार के सामूहिक पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र होते हैं बल्कि सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का भी एक बेहतरीन माध्यम माने जाते हैं। अमेठी क्षेत्र में दुर्गा पूजा का यह उत्सव दशकों पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है जहाँ हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ उत्सव में भाग लेते हैं। इस तरह के आयोजनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक मजबूत और उत्तरदायी कमेटी की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है जो स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर सके और सुरक्षा, साफ-सफाई तथा बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को समय पर सुनिश्चित करा सके। कमेटियों का पुनर्गठन होने से नई ऊर्जा और नए विचारों का संचार होता है जिससे पिछले वर्षों की कमियों से सीख लेते हुए इस बार के आयोजनों को और अधिक भव्य और व्यवस्थित रूप दिया जा सके।
आगामी उत्सव की तैयारियां और भविष्य की कार्ययोजना अमेठी के इन्हौना में नवगठित केंद्रीय दुर्गा पूजा कमेटी के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी आने वाले दिनों में सभी पूजा पंडालों और आयोजकों के साथ मिलकर एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने की होगी। अध्यक्ष चुने जाने के बाद श्रवण गुप्ता और उनकी पूरी टीम ने स्थानीय निवासियों के साथ संवाद स्थापित करना शुरू कर दिया है ताकि हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान समय रहते निकाला जा सके। आने वाले हफ्तों में विभिन्न उप-समितियों का गठन किया जाएगा जो पंडाल निर्माण, मूर्ति स्थापना, यातायात प्रबंधन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेंगी। स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ भी जल्द ही औपचारिक बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कानून व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें जिससे इस वर्ष का उत्सव शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के माहौल में संपन्न हो सके।