गोमती नदी का उफान और धार्मिक स्थलों पर असर
पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद मैदानी इलाकों की नदियां उफान पर बह रही हैं जिनका सीधा असर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पर पड़ा है। राजधानी में गोमती नदी का जलस्तर पिछले आठ दिनों से लगातार बिना रुके बढ़ रहा है जिससे स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। नदी का बढ़ता पानी शहर के कई निचले इलाकों को अपनी चपेट में ले चुका है और इसका असर प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी साफ नजर आ रहा है। बाढ़ का पानी अब प्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी मंदिर के परिसर के अंदर तक पहुंच गया है। इसके अलावा हनुमंत धाम का पूरा परिसर भी पानी से घिर गया है और वहां भी जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शहर के ऐतिहासिक लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह के भीतर तक पानी पहुंच चुका है जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय प्रशासन की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इस गंभीर स्थिति के चलते मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और नदी के किनारे बने इन पवित्र स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
दो दशकों का रिकॉर्ड टूटा और रिहायशी इलाके डूबे
राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के विकराल रूप ने पिछले दो दशकों के सभी पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह में बाढ़ का पानी पूरे बीस साल बाद पहुंचा है। इससे पहले ठीक ऐसी ही गंभीर स्थिति साल 2006 में बनी थी जब नदी का जलस्तर इस तरह से खतरे के निशान को पार कर गया था। केवल धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि नदी के आसपास बसे रिहायशी इलाके भी इस जलप्रलय की चपेट में आ चुके हैं। फैजुल्लागंज इलाके की बस्तियों में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं जहां लगभग चालीस हजार घरों के भीतर चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। लोगों के घरों के अंदर पानी भर जाने के कारण उनका दैनिक जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और उन्हें सुरक्षित स्थानों की तलाश करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जिला प्रशासन और राहत टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में नजर बनाए हुए हैं और पानी के बहाव तथा जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से समय रहते निपटा जा सके।
व्यापक बाढ़ का संकट और अन्य जिलों के हालात
उत्तर प्रदेश के भीतर केवल लखनऊ ही नहीं बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण कुल ग्यारह जिले इस समय भयंकर बाढ़ की चपेट में हैं। इनमें सीतापुर और लखनऊ जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं जहां नदियां उफान पर होने के कारण जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। राज्य के अन्य हिस्सों की बात करें तो बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर जिलों में सोमवार की रात अचानक तेज आंधी और बारिश के साथ ओले भी गिरे। इस बेमौसम आंधी और ओलावृष्टि के कारण कई स्थानों पर बड़े पेड़ और बिजली के पोल जमीन पर गिर गए जिससे यातायात और बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इसके साथ ही खेतों में खड़ी फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है जिससे किसानों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में देश के कई अन्य राज्यों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है लेकिन उत्तर प्रदेश के इन बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ और वक्त लग सकता है। स्थानीय प्रशासन बाढ़ पीड़ितों को राहत और बचाव सामग्री पहुंचाने के लिए लगातार अपने स्तर पर आवश्यक कदम उठा रहा है।