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धार्मिक उल्लास: हाथरस में कर्मचारियों ने मनाई विश्वकर्मा जयंती, मशीनों और औजारों की पूजा कर मांगी सफलता

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में कर्मचारियों और कामगारों ने पारंपरिक उत्साह के साथ विश्वकर्मा जयंती का पावन पर्व मनाया, जिसमें उपकरणों और फैक्टरी उपकरणों की विशेष पूजा की गई।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 17:33
धार्मिक उल्लास: हाथरस में कर्मचारियों ने मनाई विश्वकर्मा जयंती, मशीनों और औजारों की पूजा कर मांगी सफलता
उत्तर प्रदेश के हाथरस क्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा की जयंती का उत्सव बेहद धूमधाम के साथ मनाया गया। इस दौरान विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, कार्यालयों और कार्यस्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर अपनी आस्था का परिचय दिया। सनातन परंपरा के अनुसार सृष्टि के पहले शिल्पकार और वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा को समर्पित इस विशेष दिन पर मेहनतकश वर्ग ने अपनी आजीविका के मुख्य साधनों यानी विभिन्न प्रकार के यंत्रों, औजारों और निर्माण उपकरणों की विधिवत पूजा-अर्चना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने कामगारों के बीच आपसी सौहार्द और कार्यस्थल पर सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार किया।

कर्मठता और सृजन के देवता का स्मरण

हाथरस की विभिन्न कर्मशालाओं और प्रतिष्ठानों में सुबह से ही एक अलग ही रौनक देखने को मिली। कर्मचारियों ने अपने कार्यस्थलों को साफ-सुथरा कर फूलों से सजाया और पारंपरिक अनुष्ठान किए। इस पावन अवसर पर उपस्थित लोगों ने भगवान विश्वकर्मा के चरणों में नमन करते हुए आने वाले समय में अपने कार्यों में सफलता, सुरक्षा और समृद्धि की कामना की। कामगारों का मानना है कि जो लोग मेहनत और लगन से अपनी आजीविका चलाते हैं, उनके लिए यह पर्व प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। इस दिन यंत्रों की पूजा करने का मुख्य उद्देश्य तकनीकी कार्यों में निरंतरता बनाए रखना और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से रक्षा की प्रार्थना करना होता है। समाज में शिल्पकला, तकनीकी दक्षता और निर्माण कार्यों से जुड़े सभी वर्ग इस पर्व को बहुत श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इस वर्ष भी हाथरस के विभिन्न बाजारों और कारखानों में भगवान विश्वकर्मा की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गईं, जहां लोगों ने विधि-विधान से हवन और पूजन किया। बुजुर्गों और वरिष्ठ कारीगरों ने युवा पीढ़ी को इस परंपरा के महत्व से अवगत कराया और बताया कि किस प्रकार ईमानदारी से किया गया श्रम ही सच्ची ईश्वर की आराधना है। पूजा के पश्चात सभी ने एक-दूसरे को प्रसाद वितरित किया और उत्सव की बधाई दी।

व्यापक उत्साह और भविष्य की प्रेरणा

इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन कामगार वर्ग को अपनी संस्कृति से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। हाथरस में हुए इन आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपनी पुरानी परंपराओं और आस्थाओं को उतनी ही शिद्दत से निभा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हुए इन कार्यक्रमों में हर वर्ग के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और भगवान विश्वकर्मा से देश एवं समाज की प्रगति के लिए आशीर्वाद मांगा। इस आयोजन की सफलता ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि श्रम का सम्मान और उपकरणों के प्रति कृतज्ञता ही सच्ची उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।
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