लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 4 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का समय सुबह 9 बजे निर्धारित किया गया है। इस आयोजन के लिए विश्व हिंदू रक्षा परिषद द्वारा समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। शहर में कई स्थानों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें अखिलेश यादव से इस धर्म संसद में भाग लेने की अपील की गई है। इस विशाल आयोजन में कुल 21 देशों से प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे और विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। कार्यक्रम का मुख्य एजेंडा मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के लिए एक भव्य और विशाल मंदिर के निर्माण की मांग को उठाना है। आयोजन स्थल गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिनिधियों का स्वागत किया जा सके। स्थानीय स्तर पर इस आयोजन को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं।
पोस्टर के जरिए अखिलेश यादव पर राजनीतिक तंज
आयोजकों ने पोस्टर के माध्यम से अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए उन पर तीखा राजनीतिक कटाक्ष भी किया है। पोस्टर की भाषा में सपा अध्यक्ष को ईदगाह जाने का स्मरण कराते हुए धर्म संसद में उपस्थिति दर्ज कराने की नसीहत दी गई है। आयोजकों का तर्क है कि जिस प्रकार वे मुस्लिम वोटों को साधने के लिए ईद के अवसर पर ईदगाह जाते हैं, उसी तर्ज पर उन्हें सनातनियों का साथ देने के लिए इस धर्म संसद में आना चाहिए। पोस्टर में उनसे विदेशी आक्रांताओं की निशानियों को मिटाने और मथुरा में मंदिर निर्माण के पक्ष में समर्थन देने की बात कही गई है। इस तरह के पोस्टर शहर के मुख्य हिस्सों में लगाए गए हैं, जो राहगीरों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव के नाम लिखे इन संदेशों को जनता के बीच प्रचारित किया है ताकि मथुरा मंदिर निर्माण के मुद्दे पर राजनीतिक बहस को और अधिक तेज किया जा सके।
मथुरा मंदिर निर्माण को लेकर नया संदेश
अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद के आयोजन के पीछे का मुख्य उद्देश्य मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण के आंदोलन को एक नई गति देना है। पोस्टर पर स्लोगन के तौर पर लिखा गया है कि अयोध्या और काशी तो केवल झांकी हैं, अब केवल मथुरा ही बाकी है। यह नारा हिंदू संगठनों के उस लंबे समय से चले आ रहे एजेंडे को दर्शाता है, जिसमें मथुरा को भी अयोध्या और काशी की श्रेणी में रखकर मंदिर निर्माण की मांग को प्रमुखता दी गई है। कार्यक्रम में आने वाले 21 देशों के प्रतिनिधि इस विषय पर अपना दृष्टिकोण रखेंगे और मंदिर निर्माण की आवश्यकता पर बल देंगे। यह धर्म संसद न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगी, बल्कि मथुरा के मुद्दे को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने का एक प्रयास भी है। आयोजकों को उम्मीद है कि इस मंच के माध्यम से मंदिर निर्माण के पक्ष में जनमत तैयार किया जाएगा और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।