कल्यानी नदी घाट पर संपन्न हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में गणेशोत्सव के अंतिम चरण के दौरान अत्यंत उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला जहां विभिन्न पंडालों में स्थापित भगवान गणेश की मूर्तियों को विसर्जन के लिए ले जाया गया। इस सिलसिले में शहर और आसपास के इलाकों से भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और पारंपरिक भजनों तथा जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। निर्धारित मार्ग से होते हुए ये शोभायात्राएं कल्यानी नदी घाट तक पहुंचीं जहां विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमाओं को जल में प्रवाहित किया गया। नदी घाट पर स्थानीय लोगों और समितियों के सदस्यों ने पूरी अनुशासनबद्धता के साथ विसर्जन की रस्मों को पूरा किया जिससे किसी भी तरह की असुविधा से बचा जा सका। इस दौरान सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे ताकि भीड़भाड़ वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में आने वाले हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सभी लोग बिना किसी बाधा के अपने आराध्य को विदाई दे सकें।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की विशेष चौकसी किसी भी बड़े सार्वजनिक और धार्मिक आयोजन के दौरान कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को कायम रखना स्थानीय प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है और बाराबंकी में भी गणेश विसर्जन के अवसर पर इसी नीति का पूरी सख्ती से पालन किया गया। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले ही कल्यानी नदी घाट और शोभायात्रा के पूरे मार्ग का निरीक्षण कर लिया था ताकि संभावित भीड़ और ट्रैफिक के दबाव को अच्छी तरह संभाला जा सके। संवेदनशील बिंदुओं पर अतिरिक्त पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ पीएसी के जवानों और यातायात पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था ताकि किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा माहौल बिगाड़ने के प्रयासों को तुरंत नाकाम किया जा सके। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने विभिन्न पूजा समितियों के समन्वयकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखा जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित हुआ और जुलूस अपने तय समय तथा मार्गों के अनुसार ही आगे बढ़ा। इस प्रकार की प्रशासनिक सतर्कता और समितियों के सहयोग के कारण ही उत्सव का यह पावन पर्व बिना किसी व्यवधान के अपनी मंजिल तक पहुंच सका और पूरे इलाके में भाईचारा तथा सौहार्द का संदेश प्रसारित हुआ।
भक्तों की भारी भीड़ और अगले साल फिर आने के संकल्प के साथ विदाई कल्यानी नदी के तट पर उमड़े जनसैलाब ने इस बात को साबित कर दिया कि लोगों के मन में गणेश उत्सव को लेकर कितनी गहरी आस्था और उत्साह समाया हुआ है। जब मूर्तियों को विसर्जित किया जा रहा था तब श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं और हर किसी की जुबान पर अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारे गूंज रहे थे। इस धार्मिक अनुष्ठान के सफलतापूर्ण संपन्न होने के बाद स्थानीय व्यापार मंडलों, नागरिकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने चैन की सांस ली है और प्रशासन के सहयोग की सराहना भी की है। आने वाले दिनों में इस तरह के आयोजनों के लिए यह पूरी प्रक्रिया एक मिसाल बन गई है कि किस प्रकार जनता और प्रशासन मिलकर किसी बड़े सांस्कृतिक पर्व को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित कर सकते हैं। इस सफल विसर्जन यात्रा के साथ ही बाराबंकी में गणेशोत्सव का यह वार्षिक पर्व अपनी तमाम खट्टी-मीठी यादों और सांस्कृतिक धरोहर की छाप छोड़ते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।