तिलक समारोह में दिखी सियासी हलचल
विजयदशमी के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर में गोरक्षपीठाधीश्वर के तिलक एवं आशीर्वाद लेने की पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया। इस वर्ष मंदिर परिसर में लोगों की उपस्थिति सामान्य वर्षों की तुलना में कहीं अधिक रही। मुख्यमंत्री के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर के दायित्वों के कारण बड़ी संख्या में राजनीतिक हस्तियों ने आशीर्वाद लेने के लिए कतार लगाई। गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित कार्यालय के पास बने बड़े हॉल में यह आयोजन संपन्न हुआ। मंदिर में सुबह से ही भीड़ उमड़ने लगी थी, जो पूरे समय बनी रही। हॉल से लेकर लगभग 300 मीटर की दूरी तक लोग कतारबद्ध खड़े दिखाई दिए। भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम दो घंटे का निर्धारित था, लेकिन मुख्यमंत्री को करीब तीन घंटे तक वहां उपस्थित रहना पड़ा। इस आयोजन में गोरखपुर के अलावा अन्य कई जिलों के राजनीतिक कार्यकर्ता और नेता भी बड़ी संख्या में सम्मिलित होने पहुंचे थे।
पूजा और आशीर्वाद की विस्तृत प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने सुबह लगभग डेढ़ घंटे तक श्रीनाथ जी की पूजा-अर्चना पारंपरिक वेशभूषा में पूर्ण की। पूजा के बाद कुछ समय विश्राम कर वे तिलक कार्यक्रम के लिए निश्चित हॉल में पहुंच गए। सबसे पहले मंदिर से जुड़े साधु-संतों ने तिलक लगाकर आशीर्वाद ग्रहण किया, जिसके बाद भक्तों और नेताओं का प्रवेश शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने बैरिकेडिंग रहित वातावरण में लोगों से भेंट की और आशीर्वाद दिया। भक्तों ने तिलक लगाकर उन्हें नमन किया। आशीर्वाद के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर ने नवरात्र के दौरान मंदिर की शक्तिपीठ में उगाए गए जौ का ज्वारा और प्रसाद वितरित किया। परिसर में मौजूद कई लोगों के कानों पर यह ज्वारा लगा हुआ था। आयोजन स्थल पर भोजन के प्रबंध किए गए थे, लेकिन लोगों की प्राथमिकता मुख्यमंत्री से मिलने की रही। वहां उपस्थित लोगों ने एक-एक कर बारी-बारी से प्रवेश किया। सांसद रविकिशन सहित भाजपा और हिन्दू युवा वाहिनी के पुराने कार्यकर्ता भी इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद रहे।
आगामी चुनाव और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति
विजयदशमी के इस तिलक कार्यक्रम में राजनीतिक सरगर्मी स्पष्ट रूप से देखी गई, जिसमें वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव की छाप साफ महसूस की गई। इस बार टिकट की आकांक्षा रखने वाले कई नेताओं ने वहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंदिर परिसर में राजनीतिक चेहरों का जमावड़ा था जो आशीर्वाद लेने के बाद भी काफी देर तक परिसर में ही डटे रहे। कार्यक्रम में न केवल राजनीतिक व्यक्ति, बल्कि राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात कई आईएएस और पीसीएस अधिकारी भी पहुंचे। ये अधिकारी सुबह के समय मंदिर आए और मुख्यमंत्री से भेंट करने के उपरांत शाम तक अपने-अपने कार्यस्थलों के लिए रवाना हो गए। अन्य जिलों से आए राजनीतिक दिग्गजों की मौजूदगी ने इस आयोजन के महत्व को और बढ़ा दिया। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इस बार का दृश्य आने वाले चुनावी वर्ष की आहट की तरह महसूस किया गया। मंदिर परिसर में देर शाम तक लोगों का आना-जाना और गहमागहमी का माहौल बना रहा।