गणेश महोत्सव के समापन पर हुआ दुखद हादसा उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में गणेश महोत्सव के समापन के अवसर पर आयोजित एक सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अचानक अफरा-तफरी मच गई जब एक कलाकार गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना उत्सव के आखिरी दिन की है जब विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और झांकियां पेश की जा रही थीं। इसी दौरान एक कलाकार द्वारा पारंपरिक शिव तांडव नृत्य के माध्यम से अपनी कला का प्रदर्शन किया जा रहा था। इस प्रस्तुति के दौरान मुंह से आग बाहर छोड़ने या आग से जुड़े कुछ करतब दिखाने की कोशिश की जा रही थी जो इस तरह के नृत्यों में अक्सर रोमांच पैदा करने के लिए किए जाते हैं। दुर्भाग्यवश यह करतब पूरी तरह नियंत्रित नहीं रह सका और आग की लपटें अनियंत्रित होकर सीधे कलाकार के शरीर और चेहरे की तरफ फैल गईं। आग की चपेट में आने से वह कलाकार गंभीर रूप से झुलस गया और मौके पर मौजूद लोगों में चीख-पुकार मच गई। तुरंत राहत कार्य शुरू करते हुए आयोजकों और वहां मौजूद अन्य सहयोगियों ने आग पर काबू पाया और झुलसे हुए कलाकार को गंभीर हालत में तुरंत स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी पहुंचाया गया जहां उसका इलाज शुरू किया गया।
धार्मिक आयोजनों में जोखिम भरे करतबों की बढ़ती परंपरा देशभर के विभिन्न हिस्सों की तरह उत्तर प्रदेश के हरदोई क्षेत्र में भी गणेश चतुर्थी और अन्य धार्मिक उत्सवों का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया जाता है जिसमें सांस्कृतिक मंडलियों द्वारा तरह-तरह की प्रस्तुतियां दी जाती हैं। इन आयोजनों में लोगों का मनोरंजन करने और उत्सव का माहौल बढ़ाने के लिए अक्सर शिव तांडव या अन्य पौराणिक कथाओं पर आधारित नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं जिनमें कई बार कलाकार अपनी जान जोखिम में डालकर खतरनाक स्टंट करते हैं। मुंह से आग निकालना या जलती हुई वस्तुओं के साथ नृत्य करना ऐसे ही कुछ जोखिम भरे करतब हैं जिन्हें बिना किसी पेशेवर सुरक्षा उपकरण या अग्निशामक व्यवस्था के मंच पर अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार की घटनाओं से यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त ध्यान रखा जाता है या नहीं। आयोजकों और कलाकारों के बीच सुरक्षा को लेकर अक्सर लापरवाही देखी जाती है क्योंकि वे तात्कालिक रोमांच और दर्शकों की वाहवाही के चक्कर में बुनियादी सावधानियों को नजरअंदाज कर देते हैं। इस तरह के आयोजनों के दौरान न तो मौके पर दमकल की गाड़ियां होती हैं और न ही किसी प्रकार के आपातकालीन चिकित्सा दल की तैनाती की जाती है जिससे जरा सी चूक होने पर यह मामूली लापरवाही जानलेवा हादसे में बदल जाती है और पूरा उत्सव मातम में तब्दील हो जाता है।
प्रशासनिक सतर्कता और आयोजकों के लिए कड़ा सबक हरदोई में हुई इस दुर्घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और उनमें सुरक्षा के इंतजामों को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। इस घटना ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को भी सतर्क कर दिया है क्योंकि बिना अनुमति और बिना सुरक्षा मानकों के ऐसे खतरनाक करतबों का मंचन किसी भी समय बड़ी जनहानि का कारण बन सकता है। आने वाले दिनों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक समितियों की बैठकों में कड़े निर्देश जारी किए जाने की संभावना है ताकि भविष्य में कोई भी कलाकार इस तरह के जोखिम भरे खेल बिना सुरक्षा उपकरणों के न खेले। स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराए गए कलाकार की स्थिति पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उसके समुचित इलाज का प्रयास किया जा रहा है ताकि वह जल्द से जल्द स्वस्थ हो सके। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्धजनों का भी यह मानना है कि धर्म और आस्था के इन आयोजनों में भव्यता के साथ-साथ मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। इस प्रकार की दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए समितियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपने कार्यक्रमों में इस तरह के खतरनाक और जानलेवा करतबों पर पूरी तरह रोक लगाएं या फिर पुख्ता सुरक्षा उपायों के साथ ही किसी गतिविधि की अनुमति दें।