लखनऊ में आज महाअष्टमी पर कन्या पूजन
लखनऊ जिले के विभिन्न इलाकों में आज शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी का पावन पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज के दिन श्रद्धालु घरों और मंदिरों में कन्या पूजन कर रहे हैं जिसे महाष्टमी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इस अवसर पर भक्तगण नौ वर्ष से कम आयु की कन्याओं को अपने घर आमंत्रित करते हैं और उन्हें माता दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका विधि-विधान से सत्कार करते हैं। शहर के तमाम प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जुटने लगी है और लोग कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। मंदिर परिसरों को फूलों और रोशनी से बेहद आकर्षक ढंग से सजाया गया है जिससे पूरे वातावरण में एक अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है। घरों में महिलाएं अहले सुबह उठकर साफ-सफाई के बाद हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद तैयार करती हैं जिसे बाद में कन्याओं को बड़े आदर के साथ परोसा जाता है। इस अनुष्ठान के दौरान कन्याओं के चरण धोए जाते हैं उन्हें माथे पर कुमकुम का तिलक लगाया जाता है और कलाई पर कलावा बांधा जाता है। पूजन संपन्न होने के बाद भक्तगण कन्याओं को उपहार और दक्षिणा भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और यह सिलसिला दिनभर अलग-अलग समय पर चलता रहता है।
कल मनाई जाएगी महानवमी की तिथि
पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महानवमी का पर्व कल यानी रविवार को मनाया जाएगा। महाअष्टमी के ठीक अगले दिन आने वाली महानवमी का हिन्दू धर्म में अत्यंत विशिष्ट स्थान होता है और इस दिन माता सिद्धिदात्री की विशेष रूप से आराधना की जाती है। लखनऊ के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण अंचलों में नौमी तिथि को लेकर तैयारियां अभी से अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं। कई स्थानों पर हवन और पूर्णाहुति के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा जिनमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु भाग लेंगे। मंदिरों के पुजारी और विद्वान आचार्य बताते हैं कि नवमी तिथि के दिन हवन करने से माता रानी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इस दिन भी कई परिवारों में कन्या पूजन का क्रम जारी रहता है क्योंकि कुछ लोग अष्टमी के साथ-साथ नवमी तिथि को भी कन्याओं को जिमाना अत्यंत शुभ मानते हैं। सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं ताकि भीड़भाड़ वाले मंदिरों और पूजा स्थलों पर किसी प्रकार की असुविधा न हो। बाजारों में पूजन सामग्री, फल, फूल और मिठाइयों की दुकानों पर ग्राहकों की काफी चहल-पहल देखी जा रही है जिससे व्यापारियों में भी काफी उत्साह का माहौल बना हुआ है।
धार्मिक महत्व और परंपराओं की पृष्ठभूमि
शरद नवरात्रि के इन पावन दिनों का सनातन संस्कृति में बहुत गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व बताया गया है। प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय अनुष्ठान में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की नौ दिनों तक लगातार पूजा-अर्चना की जाती है। अष्टमी और नवमी तिथि को इस व्रत और अनुष्ठान का सबसे प्रमुख पड़ाव माना जाता है क्योंकि इन दो दिनों में विशेष साधना और कन्या पूजन का विधान है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार कन्याओं को साक्षात मां दुर्गा का रूप माना गया है और उनका पूजन करने से साधक को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। लखनऊ जैसे बड़े महानगरों में आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपनी प्राचीन परंपराओं और रीति-रिवाजों को पूरी निष्ठा के साथ निभाते आ रहे हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि यह समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सौहार्द को भी बढ़ावा देने का एक बहुत बड़ा माध्यम बनता है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर इन आयोजनों को सफल बनाते हैं जिससे आपसी रिश्तों में और अधिक प्रगाढ़ता आती है और नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। आने वाले दिनों में विजयादशमी के पर्व के साथ ही नवरात्रि के इन पावन अनुष्ठानों का समापन होगा जिसके लिए भी शहर भर में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।