गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री का आगमन
रविवार को गोरखपुर के अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीधे गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही उन्होंने सबसे पहले मुख्य मंदिर में जाकर बाबा गोरखनाथ के समक्ष दर्शन और पूजा अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर उन्हें नमन किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। शाम के समय से लेकर पूरी रात उन्होंने शक्ति की उपासना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों में अपना समय समर्पित किया। जैसे ही वे महानिशा पूजन के लिए शक्तिपीठ के गर्भगृह में प्रविष्ट हुए, वहां का वातावरण मां भगवती के उद्घोषों से गूंज उठा। इस आयोजन के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित रहे, जो इस धार्मिक वातावरण का हिस्सा बने। मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम पूरी तरह से आध्यात्मिक गतिविधियों और प्राचीन हिंदू परंपराओं के निर्वहन पर केंद्रित रहा, जहां उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ अनुष्ठान किए।
विधि-विधान से संपन्न हुआ महानिशा पूजन
महानिशा पूजन की प्रक्रिया गौरी-गणेश और वरुण देव के पूजन के साथ शुरू हुई, जिसके बाद अनुष्ठान की श्रृंखला आगे बढ़ी। मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ में यंत्र और मां दुर्गा की विधिपूर्वक आराधना की। इसके पश्चात उन्होंने भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का षोडशोपचार पूजन किया। इसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता का ध्यान करते हुए नवग्रह, विल्व, अधिष्ठात्री देवताओं के साथ-साथ शस्त्रों की भी पूजा संपन्न की गई। अनुष्ठान का विस्तार करते हुए उन्होंने द्वादश ज्योतिर्लिंगों, अर्धनारीश्वर स्वरूप तथा शिव-शक्ति के मिलन की उपासना भी की। वटुक भैरव, काल भैरव और त्रिशूल पर्वत के पूजन के माध्यम से उन्होंने विशिष्ट आध्यात्मिक ऊर्जा का आह्वान किया। हवन कुंड की अग्नि में ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र और स्वयं अग्निदेव का आवाहन कर मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी गईं। दो घंटे से अधिक समय तक चले इस भव्य अनुष्ठान में शक्ति साधना की प्राचीन परंपराओं का सजीव चित्रण देखने को मिला, जहाँ लगातार वैदिक छंदों का पाठ जारी रहा।
पूजा समापन और जन कल्याण की प्रार्थना
महानिशा पूजन के अंतिम चरणों में मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ में तैयार की गई विशेष वेदी पर उगे जौ के पौधों को विधिवत काटा। यह क्रिया शक्ति उपासना के अनुष्ठान का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे उन्होंने बड़ी गंभीरता से संपन्न किया। इसके माध्यम से उन्होंने मां आदिशक्ति के समक्ष राज्य के समस्त निवासियों के सुखमय और समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना की। हवन पूर्ण होने के उपरांत उन्होंने आरती की और प्रभु से किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना की। इस प्रक्रिया के अंत में प्रसाद का वितरण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया। यह आयोजन गोरखनाथ मंदिर की उस गौरवशाली परंपरा को दर्शाता है, जिसमें मुख्यमंत्री गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में स्वयं शामिल होकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। इस पूरे अनुष्ठान ने मंदिर के परिसर में एक पवित्र और ऊर्जावान वातावरण का संचार किया, जिसने वहां मौजूद सभी भक्तों को भक्ति भाव से ओत-प्रोत कर दिया।