त्रिकूट पर्वत पर नवरात्रि का आगाज
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक नगर मैहर में शारदीय नवरात्रि पर्व का विधिवत आरंभ हो गया है। त्रिकूट पर्वत की चोटी पर विराजमान मां शारदा देवी के दरबार में पहले ही दिन से भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। पर्व के पहले दिन रविवार को मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ नौ दिवसीय आध्यात्मिक अनुष्ठानों का श्रीगणेश हुआ। तड़के तीन बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे, जिसके बाद से ही दर्शन और पूजन का अनवरत सिलसिला चल रहा है। आज के इस पावन दिन पर देश के विभिन्न हिस्सों और मध्य प्रदेश के तमाम जिलों से लाखों भक्तों के माता के दरबार में हाजिरी लगाने की पूरी संभावना है। सुबह की पहली आरती के दौरान लाल वस्त्रों में सजी मां शारदा के भव्य स्वरूप के दर्शन कर भक्तजन निहाल हो गए। मंदिर परिसर और आसपास का पूरा इलाका माता के जयकारों से गूंज उठा तथा वहां का संपूर्ण वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय उल्लास में सराबोर नजर आया।
मां शैलपुत्री की विशेष आराधना
नवरात्रि के प्रथम दिवस पर देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल तथा बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि नवरात्रि के पहले दिन जो भी साधक पूरी श्रद्धा के साथ मां शैलपुत्री की आराधना करता है, उसे बल, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। मैहर के इस पावन मंदिर में दर्शन करने आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के मन में अद्भुत उत्साह और अपार आस्था का भाव साफ झलकता है। भक्तगण कतारों में खड़े होकर मां शारदा के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की मंगल कामना कर रहे हैं। प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से भी इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं ताकि दर्शन सुचारू रूप से चल सकें।
आगामी नौ दिनों तक भक्तिमय माहौल
मैहर स्थित मां शारदा के इस पवित्र मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पर्व का अत्यधिक विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। यहां नौ दिनों तक चलने वाले इस मेले और उत्सव के दौरान भक्तों का तांता लगा रहता है और पूरा क्षेत्र अध्यात्म के रंग में रंग जाता है। आने वाले अगले नौ दिनों तक मैहर नगर की फिजाओं में केवल भक्ति, आस्था और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की गूंज बनी रहेगी। देश के कोने-कोने से लोग इस विशेष अवधि में माता के दर्शन की लालसा लेकर यहां पहुंचते हैं। सुबह की मंगला आरती से लेकर रात्रि तक मंदिर परिसर में भक्तों का हुजूम उमड़ता रहता है और सभी माता के दरबार में अपनी हाजिरी लगाते हैं। इस प्रकार मैहर की पावन नगरी इन नौ दिनों में धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन जाती है जहां हर तरफ केवल माता के जयकारे सुनाई देते हैं और हर श्रद्धालु इसी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आता है।