नदी के कटान से मंदिर को खतरा
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में स्थित हेतमापुर गांव इन दिनों सरयू नदी के बढ़ते कटाव के कारण चर्चा में है। यहां का बाबा नारायण दास मंदिर लगभग 1100 साल पुराना माना जाता है और वर्तमान में यह नदी के पानी के तीव्र बहाव के कारण संकट में आ गया है। पिछले कुछ दिनों में सरयू नदी का जलस्तर कम हुआ है, लेकिन इसके साथ ही किनारों की मिट्टी का कटाव काफी तेज हो गया है। नदी की प्रबल धारा लगातार उस जमीन को काट रही है जहां यह ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। इस स्थिति को लेकर इलाके के लोग बेहद चिंतित हैं क्योंकि मंदिर का अस्तित्व सीधे तौर पर नदी के रुख पर निर्भर हो गया है। ग्रामीणों की नजरें लगातार नदी के बढ़ते और घटते स्तर तथा तट के कटाव की तीव्रता पर टिकी हुई हैं। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि क्षेत्र के लोगों के लिए वर्षों पुराने भाईचारे और साझा इतिहास का एक प्रमुख प्रतीक भी माना जाता है।
मुस्तफा की भावुक प्रार्थना और आधिकारिक कार्रवाई
इस कठिन समय में हेतमापुर के रहने वाले 88 साल के मुस्तफा ने सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल पेश की है। उन्होंने मंदिर को बचाने के लिए अत्यंत भावुक होकर प्रार्थना की है कि किसी भी कीमत पर यह पवित्र स्थान नदी में समाना नहीं चाहिए। उनका आग्रह है कि यदि आवश्यक हो तो नदी उनकी बाली ले ले, लेकिन बाबा नारायण दास के इस प्राचीन मंदिर को सुरक्षित रखा जाए। उनकी इस मार्मिक अपील ने पूरे क्षेत्र में लोगों को प्रभावित किया है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन और बाढ़ खंड विभाग की टीमें स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं। बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शशिकांत सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभागीय कर्मचारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल अधिकारियों के अनुसार मंदिर सुरक्षित है और किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए बचाव कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन नदी के बदलते रुख पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
सामुदायिक एकता का प्रतीक बना मंदिर
बाबा नारायण दास का यह प्राचीन मंदिर बाराबंकी जिले में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की एक जीवित निशानी के रूप में देखा जाता है। स्थानीय निवासियों के लिए यह केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं है, बल्कि एक ऐसा स्थल है जो समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ता है। मुस्तफा द्वारा की गई मंदिर बचाने की प्रार्थना ने न केवल प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि इसे मानवीय संवेदनाओं के एक उदाहरण के रूप में भी सराहा जा रहा है। नदी के किनारे होने वाले कटाव के कारण पैदा हुई इस चुनौती ने ग्रामीणों को एकजुट कर दिया है। बाढ़ खंड की टीम का कहना है कि जलस्तर में गिरावट के दौरान किनारे की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे कटाव की दर बढ़ जाती है। इसी कारण से बचाव दल को अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर के चारों ओर निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की क्षति को समय रहते रोका जा सके। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन के निरंतर प्रयासों से उनका यह ऐतिहासिक मंदिर सुरक्षित बना रहेगा।