सजेती के प्राचीन मंदिर में बड़ी चोरी की घटना
कानपुर के सजेती इलाके में स्थित मैधरी गांव में चोरों ने एक प्राचीन राधा-कृष्ण मंदिर को अपना निशाना बनाया है। गुरुवार की देर रात अज्ञात चोर मंदिर के भीतर प्रवेश कर गए और वहां गर्भगृह में स्थापित अष्टधातु की बेशकीमती मूर्तियां चुरा ले गए। इन मूर्तियों को चोरी करने की घटना तब सामने आई जब मंदिर परिसर में सो रही एक वृद्ध महिला सुबह पांच बजे सोकर उठीं। उन्होंने मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं को वहां से गायब पाया, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने घटना के तुरंत बाद आसपास के क्षेत्रों में मूर्तियों की काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लग सका। यह पूरा मामला सजेती थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां प्राचीन मंदिरों की सुरक्षा पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोग इस घटना के बाद से काफी आक्रोशित हैं क्योंकि यह मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का एक बड़ा केंद्र माना जाता है और मूर्तियां अत्यधिक पुरानी होने के कारण पुरातात्विक महत्व भी रखती हैं।
पुलिस जांच और परिवार की शिकायत का ब्यौरा
मंदिर के मालिक रामप्रकाश तिवारी ने इस चोरी की घटना को लेकर स्थानीय सजेती थाने में तहरीर दी है। रामप्रकाश ने पुलिस को बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा गांव में इस मंदिर का निर्माण कराया गया था, जहां कई दशकों से अष्टधातु की ये मूर्तियां विधि-विधान से स्थापित थीं। चोरी की इस पूरी घटना के दौरान मंदिर में उनकी वृद्ध बहन सो रही थीं, जिन्हें चोरों की आहट तक नहीं मिली और वे आसानी से वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। पुलिस ने तहरीर मिलते ही मामले की गहन जांच पड़ताल शुरू कर दी है और घटनास्थल का मुआयना किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वे आसपास के लोगों से पूछताछ कर रहे हैं ताकि चोरों का कोई सुराग मिल सके। मंदिर के गर्भगृह से हुई इस चोरी को लेकर रामप्रकाश तिवारी ने पुलिस से चोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस टीम ने यह आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोषियों को पकड़कर मूर्तियों की बरामदगी का प्रयास किया जाएगा।
धार्मिक महत्व और परिवार की गहरी आस्था
चोरी गई राधा-कृष्ण की मूर्तियां करीब 100 साल पुरानी बताई जा रही हैं, जिन्हें लेकर गांव के लोगों में गहरा लगाव है। इन मूर्तियों के चोरी होने से परिवार की धार्मिक भावनाओं को भारी ठेस पहुंची है क्योंकि ये प्रतिमाएं पीढ़ियों से उनकी श्रद्धा और पूजा का मुख्य आधार थीं। किसी भी प्राचीन मूर्ति का चोरी होना न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के नुकसान जैसा भी है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों के बीच असुरक्षा का माहौल व्याप्त है और लोग अपने निजी मंदिरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। पुलिस अब इस पहलू पर भी काम कर रही है कि क्या चोरों को पहले से इस प्राचीन अष्टधातु मूर्ति के बारे में जानकारी थी। आने वाले समय में पुलिस की जांच यह स्पष्ट करेगी कि यह चोरी किसी गिरोह का काम है या स्थानीय स्तर पर हुई कोई सोची-समझी साजिश है। इस घटना ने एक बार फिर छोटे गांवों में स्थित अनरक्षित प्राचीन स्थलों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है, जिसके चलते प्रशासन को अब सतर्क होने की आवश्यकता है।