नौ देवी मंदिर में विशेष आस्था
अलीगढ़ के नौरंगाबाद क्षेत्र में स्थित नौ देवी मंदिर भक्तों की आस्था का मुख्य केंद्र बना हुआ है। इस ऐतिहासिक स्थल की विशेषता यहां एक ही परिसर में नौ देवियों की प्रतिमाओं का विराजमान होना है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। नवरात्र के आरंभिक दिन तड़के से ही यहां दर्शन करने वालों का तांता लगा रहा। भक्तों ने माता के चरणों में नमन कर अपने परिवार की खुशहाली और उन्नति के लिए प्रार्थनाएं की। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, यहां आने वाले लोगों की संख्या दोपहर तक निरंतर बढ़ती रही। पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में घंटे-घड़ियाल और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दे रही थी। लोग अपने साथ पूजा की थाल और प्रसाद लेकर पहुंचे थे। सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं ने अपनी बारी का इंतजार किया और शांतिपूर्ण ढंग से पूजा संपन्न की। सुबह से शुरू हुई इस पूजा का क्रम दिनभर जारी रहा, जिससे पूरा इलाका भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
विभिन्न मंदिरों में भक्तों का आगमन
शहर के अन्य प्रमुख देवी स्थलों पर भी नवरात्र के पहले दिन भारी भीड़ देखी गई। गांधी पार्क बस स्टैंड के पास स्थित प्राचीन चामुंडा मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। इसी तरह, हाथरस अड्डा स्थित पथवारी माता मंदिर में पूजा-पाठ और आरती का सिलसिला चलता रहा, जहां स्थानीय निवासियों ने पूरी श्रद्धा के साथ माथा टेका। मथुरा रोड पर स्थित दौलता माता मंदिर और स्वर्ण जयंती नगर के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए। इन सभी स्थानों पर धूप, अगरबत्ती और ताजे फूलों की महक से माहौल सुगंधित बना रहा। श्रद्धालु अपनी पूजा की थालियों में चुनरी, नारियल, फूल-माला, रोली और कलावा लेकर देवी के चरणों में अर्पित करने पहुंचे थे। दिन भर मंदिरों में आरती के साथ ही माता के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। दोपहर बीत जाने के बाद भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही कम नहीं हुई, बल्कि लोगों का उत्साह देखते ही बनता था।
प्राचीन परंपरा और बाजारों की रौनक
नौरंगाबाद का नौ देवी मंदिर 200 वर्षों से भी अधिक पुरानी परंपरा को संजोए हुए है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, इस स्थान का इतिहास हरिद्वार के अखाड़ों से जुड़े संतों और महंतों से गहरा जुड़ा है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां संतों का निवास स्थान हुआ करता था, जिन्हें दिव्य स्वप्न में माता के दर्शन हुए और मंदिर स्थापना का आदेश मिला था। इस प्राचीन परंपरा के कारण ही नवरात्र में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। त्योहार के आगमन का प्रभाव शहर के बाजारों में भी स्पष्ट रूप से देखा गया। दुकानों पर पूजा की सामग्री और माता के शृंगार के सामान की भारी बिक्री हुई। घर-घर में लोगों ने विधि-विधान से माता की चौकियां सजाईं और धूप-दीप जलाकर आराधना की। मंदिरों और घरों में की गई विशेष तैयारियों ने नवरात्र के पहले दिन शहर को पूरी तरह से श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में बदल दिया, जो श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमाण है।