नवरात्र के तीसरे दिन का विशेष अनुष्ठान
बिहार के विभिन्न जिलों में आज 13 अक्टूबर 2026 को नवरात्र का तीसरा दिन अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर राज्यभर के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भक्त अपनी आराध्य देवी मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा करने के लिए कतारों में खड़े दिखाई दिए। मंदिरों के गर्भगृहों को फूलों और रोशनी से विशेष रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। श्रद्धालु अपने हाथों में पूजा की थाली, फल, फूल और मिठाई लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। मां चंद्रघंटा की प्रतिमा के दर्शन के लिए मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी है, जिसे नियंत्रित करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रबंध किए गए हैं। लोग अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देवी के चरणों में प्रार्थना कर रहे हैं और पूरे राज्य में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम निरंतर जारी है। इस दिन का महत्व भक्तों के जीवन में शांति और साहस का संचार करने वाला माना जाता है।
श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर परिसर का दृश्य
मंदिरों में उमड़ी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। भक्तगण मां चंद्रघंटा की स्तुति में मंत्रोच्चार कर रहे हैं और मंदिर परिसर में शंख ध्वनि व घंटियों की गूंज सुनाई दे रही है। कई स्थानों पर सामूहिक आरती का आयोजन किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया है। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी को भोग अर्पित कर रहे हैं और आशीर्वाद मांग रहे हैं। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से अधिक देखी जा रही है, जो पारंपरिक परिधानों में मंदिरों तक पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शनार्थियों के लिए सुगम मार्ग और कतारों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है ताकि किसी को असुविधा न हो। पूजा के दौरान वातावरण में धूप और अगरबत्ती की सुगंध फैली हुई है, जो भक्तों के मन को शांति प्रदान कर रही है। यह दृश्य बिहार की गहरी धार्मिक जड़ों और देवी शक्ति के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाता है, जहां हर आयु वर्ग के लोग इस पर्व में शामिल हो रहे हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व
पृष्ठभूमि के रूप में यह जानना आवश्यक है कि मां चंद्रघंटा को शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, जिसके कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। नवरात्र के तीसरे दिन इनकी पूजा करने से भक्तों को दुखों से मुक्ति मिलती है और उनके भीतर नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। यह दिन साधकों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि देवी की कृपा से मन को एकाग्र करने की शक्ति प्राप्त होती है। बिहार में नवरात्र का पर्व न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह सामाजिक एकता का भी एक सशक्त माध्यम बना हुआ है। लोग इस दौरान अपने घरों में भी कलश स्थापना के साथ देवी की आराधना कर रहे हैं। मंदिरों में होने वाली यह भीड़ आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ने की संभावना है, क्योंकि नवरात्र के शेष दिनों में अन्य स्वरूपों की पूजा की जाएगी। इस प्रकार का आयोजन समाज में सकारात्मकता का प्रसार करता है और लोगों को अपनी संस्कृति से जोड़कर रखता है।