विजयादशमी से शुरू होगा विशेष प्रशिक्षण
विश्व हिंदू परिषद ने देश भर के परिवारों को उनके घरों में की जाने वाली नित्य पूजा की सरल और शास्त्रोक्त विधियों का प्रशिक्षण देने का बड़ा निर्णय लिया है। इस व्यापक योजना का शुभारंभ विजयादशमी 2026 से होगा और इसे पूरे एक वर्ष की अवधि तक क्रियान्वित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय देश के सभी राज्यों में फैले एक करोड़ परिवारों तक पहुंचना और उन्हें धर्म-संस्कारों से जोड़ना है। संस्था के अनुसार, पहली बार इस स्तर पर पंचोपचार पूजा के साथ-साथ भगवान गणेश, विष्णु, राम, कृष्ण, दुर्गा और शिवजी की उपासना के सही तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। भोपाल सहित समूचे भारत में विहिप के कार्यकर्ता इस महत्वाकांक्षी अभियान को घर-घर तक पहुंचाएंगे। जयपुर में आयोजित केंद्रीय बैठक के दौरान इस योजना को अंतिम रूप दिया गया था, जिसके तहत सनातन परिवारों को पूजा की जटिलताओं से मुक्त करने का प्रयास किया जाएगा। यह अभियान साल भर चलेगा ताकि समाज के हर वर्ग तक धार्मिक आचरण और सही विधि विधान की जानकारी सफलतापूर्वक पहुंच सके और संस्कारों का संरक्षण हो सके।
पंचोपचार और पूजन विधि का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत परिवारों को घर के मंदिर में विराजे देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के सरल चरणों की जानकारी दी जाएगी। भोपाल के प्रांत सह मंत्री जितेंद्र चौहान ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य आम सनातनी परिवारों को धार्मिक अनुष्ठानों की पेचीदगियों से दूर रखना है। सरल पूजा पद्धति को अपनाना और उसके पीछे के भावों को समझना ही इस पहल का मुख्य केंद्र बिंदु है। पूजा के दौरान की जाने वाली पंचोपचार विधि का प्रचार-प्रसार करना और उसे सहज बनाना भी इसमें शामिल है। इसके अतिरिक्त, विहिप ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने, गोसेवा और मंदिरों के पुरोहितों तथा अर्चकों को भी विशेष प्रशिक्षण देने की रणनीति तैयार की है। कई राज्यों में इन संबंधित गतिविधियों का क्रियान्वयन पहले ही प्रारंभ किया जा चुका है। अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इन विभिन्न कार्यक्रमों का उद्देश्य समाज के हर स्तर पर शुद्ध धार्मिक वातावरण और संस्कारों का बीजारोपण करना है। विहिप की टीम इस बात पर जोर दे रही है कि घरों में की जाने वाली रोज की पूजा को अधिक प्रभावी और सरल कैसे बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसे आसानी से समझ सकें।
अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष का आयोजन
अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान चलाए जा रहे इन आयोजनों का विस्तार केवल पूजा विधि तक ही सीमित नहीं है। विहिप की योजना व्यापक है, जिसमें मंदिरों के अर्चकों और पुरोहितों को प्रशिक्षित करने का कार्य भी समाहित है। इस पूरे एक साल के सफर में विहिप का ध्यान गोपालन के महत्व और सामाजिक एकरूपता को मजबूत करने पर भी रहेगा। भोपाल में स्थानीय पदाधिकारियों का कहना है कि घर-घर तक सरल पूजा पद्धति पहुंचाना संस्कारों के संरक्षण के लिए एक अत्यंत आवश्यक कदम है। आम परिवारों में पूजा की विधि को लेकर जो संशय रहता है, उसे दूर करने के लिए यह एक अनूठा प्रयास माना जा रहा है। चूंकि देश के हर राज्य में यह अभियान संचालित किया जा रहा है, इसलिए इसकी रूपरेखा में क्षेत्रीय परंपराओं और सुलभ धार्मिक आचरणों को भी ध्यान में रखा गया है। यह पूरा वर्ष अशोक सिंघल की स्मृतियों को समर्पित करते हुए सांस्कृतिक मूल्यों के उत्थान के लिए विभिन्न चरणों में कार्य करेगा। इस तरह से एक करोड़ परिवारों तक पहुंचने का लक्ष्य न केवल धार्मिक शिक्षा के प्रसार में सहायक होगा, बल्कि घर-परिवार में होने वाली नित्य पूजा की पद्धति को भी एक नई दिशा प्रदान करेगा।