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सांस्कृतिक उत्सव: भारत विकास परिषद द्वारा अपना देश-अपने त्योहार श्रृंखला के तहत तीज कार्यक्रम का भव्य आयोजन
भारत विकास परिषद द्वारा अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से 'अपना देश-अपने त्योहार' अभियान के तहत तीज महोत्सव का बहुत ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ आयोजन किया गया।
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Ankit Yadav
30 अग 2026, 13:34
भारतीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारत विकास परिषद द्वारा हाल ही में 'अपना देश-अपने त्योहार' श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष तीज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस उत्सव में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और सावन के इस पावन पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक गीतों, नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया, जिससे हर कोई भारतीय लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया।
त्योहारों का महत्व और सांस्कृतिक धरोहर
हमारे देश में मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी प्रेम के प्रतीक भी होते हैं। तीज का यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रकृति के श्रृंगार और उल्लास से जुड़ा हुआ माना जाता है। भारत विकास परिषद जैसे संगठनों द्वारा इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी प्राचीन संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक मूल्यों से परिचित कराने का एक बहुत ही सार्थक प्रयास किया जाता है। इस आयोजन में पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाए और झूला झूलने की परंपरा का आनंद लिया, जिससे पुरानी यादें ताजा हो गईं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य अतिथियों और वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ में आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है। ऐसे समय में इस प्रकार के सांस्कृतिक अनुष्ठान उन्हें अपनी ऐतिहासिक थाती से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बनते हैं। परिषद के सदस्यों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सभी आगंतुकों का स्वागत पारंपरिक विधियों से किया। कार्यक्रम के अंत में एक दूसरे को पर्व की बधाइयां दी गईं और मिठाइयों का आदान-प्रदान किया गया, जिससे आपसी सौहार्द और प्रगाढ़ हुआ।
आगामी आयोजनों की रूपरेखा और सामाजिक संदेश
इस सफल आयोजन के बाद, भारत विकास परिषद ने आने वाले महीनों में भी इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक पर्वों को भव्य स्तर पर मनाने की अपनी योजना साझा की है। संगठन का मुख्य उद्देश्य देश के कोने-कोने में सांस्कृतिक चेतना जगाना और समाज के हर नागरिक को अपनी मिट्टी से जोड़ना है। इस प्रकार के सामूहिक आयोजनों से न केवल सामाजिक दूरियां मिटती हैं, बल्कि एक मजबूत और संगठित समाज के निर्माण में भी मदद मिलती है। इस तीज महोत्सव की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि आज भी लोग अपनी संस्कृति के प्रति कितने समर्पित और जागरूक हैं, और जब ऐसे मंच मिलते हैं तो वे पूरे दिल से अपनी परंपराओं को अपनाने के लिए आगे आते हैं।