उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा की घोषणा
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने आगामी विजयादशमी के पावन पर्व से सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यह यात्रा मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित शिव धाम महाकाल मंदिर से शुरू होकर उत्तर प्रदेश में अयोध्या के रामलला मंदिर तक जाएगी। इस आयोजन की जानकारी देते हुए उन्होंने अपनी पत्नी अमृता के साथ भोपाल में एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश में दान और वोट के नाम पर हो रही कथित चोरी के खिलाफ पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को उठाना है। दिग्विजय ने कहा कि राम मंदिर में चंदा चोरी और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी जैसे विषयों को जनता के सामने रखना आवश्यक है। उन्होंने इस अभियान से जुड़ी एक डिजिटल याचिका और धर्म ध्वज भी जारी किया है, जो 20 अक्टूबर को औपचारिक रूप से अपनी यात्रा का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस दौरान ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर को भी यात्रा के मार्ग में शामिल किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्रों की शुचिता बनी रहे।
यात्रा के मुद्दे और राजनीतिक प्रतिक्रिया
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी यह यात्रा किसी विशेष धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरुद्ध नहीं है, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रद्धालुओं का चढ़ावा उनकी कड़ी मेहनत का फल होता है, जिसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हर किसी का दायित्व है। इस यात्रा के लिए उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उमा भारती को भी आमंत्रित करने की बात कही है। यात्रा के दौरान उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा करते हुए एक पुराने किस्से का जिक्र किया, जब उनकी नर्मदा परिक्रमा के समय गुजरात में अधिकारियों को विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे अमित शाह के प्रशंसक नहीं हैं, क्योंकि उनके फैसलों से लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। इसके विपरीत, कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोला है। सारंग ने उन पर आतंकवादियों का समर्थन करने और विदेशी ताकतों के इशारे पर सनातन धर्म को बदनाम करने का आरोप लगाया है, साथ ही उन्हें आरएसएस विरोधी करार दिया है।
लोकतंत्र और संस्थाओं पर दिग्विजय का रुख
दिग्विजय सिंह ने ईवीएम मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसे सॉफ्टवेयर कमांड का खेल बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 से ही वे ईवीएम में गड़बड़ी की बात कहते आए हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। सिंह ने नीट एग्जाम, एमपी पीएससी और सीजीपीएससी जैसी परीक्षाओं की संस्थाओं पर आरएसएस विचारधारा के लोगों के वर्चस्व का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के पास नागरिकता का प्रमाण मांगने का अधिकार नहीं है और फॉर्म 7 के तहत गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। दिग्विजय सिंह ने खुद को पक्का सनातनी बताते हुए कहा कि हिंदू शब्द फारसी से आया है और अब इस पर अनावश्यक बयानबाजी हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वे मुख्यमंत्री थे, तब वर्तमान आलोचक उनसे आशीर्वाद लेने आते थे। अपनी इस गैर-राजनीतिक यात्रा के माध्यम से वे समाज को यह संदेश देना चाहते हैं कि संस्थानों और आस्था के केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जनता को जागरूक होना होगा, ताकि देश में लोकतंत्र और धर्म की मर्यादा सुरक्षित रह सके।