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शिल्प उत्सव: प्रधानमंत्री ने देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती पर दी बधाई

देशभर में शिल्प कला, निर्माण कार्य और इंजीनियरिंग के प्रतीक भगवान विश्वकर्मा की जयंती के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री ने नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

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Ankit Yadav
17 सित 2026, 17:16
शिल्प उत्सव: प्रधानमंत्री ने देशवासियों को विश्वकर्मा जयंती पर दी बधाई
देश भर में आज पारंपरिक शिल्पकारों, कारीगरों, इंजीनियरों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों द्वारा श्रद्धा और उल्लास के साथ विश्वकर्मा जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों के जरिए सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और समाज के निर्माण में मेहनतकश वर्ग के अमूल्य योगदान को सराहा। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हमारे हुनरमंद कारीगरों और निर्माताओं का परिश्रम राष्ट्र की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की प्रगति की रीढ़ है, जिनके बिना किसी भी आधुनिक विकास की कल्पना करना असंभव है।

शिल्पकारों और कारीगरों का सम्मान

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला वास्तुकार और शिल्पकार माना जाता है। इस विशेष दिन पर विभिन्न कारखानों, औद्योगिक इकाइयों, कार्यशालाओं और तकनीकी संस्थानों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। लोग अपने औजारों, मशीनों और उपकरणों की सफाई कर उनकी विधिवत पूजा करते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि कर्म ही पूजा है और श्रम का हर रूप आदरणीय है। इस परंपरा के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक कौशलों के प्रति जागरूक करने का भी प्रयास किया जाता है, जो सदियों से हमारी धरोहर का अहम हिस्सा रहे हैं। आधुनिक समय में भारत सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों के उत्थान के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य इस वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है। प्रधानमंत्री के शुभकामना संदेश के बाद देश के विभिन्न राज्यों में इन योजनाओं की प्रासंगिकता और उनके माध्यम से मिल रहे लाभों पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के पर्व न केवल हमारी आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज के उन वर्गों को भी मुख्यधारा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं जो देश के बुनियादी निर्माण में चुपचाप अपना सर्वस्व समर्पित कर रहे हैं। इस पावन पर्व के अवसर पर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जहां वक्ताओं ने तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के महत्व पर जोर दिया। सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी हमारी पारंपरिक कलाएं और शिल्प कौशल जीवित रहें और निरंतर फलें-फूलें। प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देश भर के लाखों कारीगरों और कामगारों में एक नया उत्साह भर दिया है, जिससे वे पूरी निष्ठा और ऊर्जा के साथ राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में अपना योगदान देते रहने का संकल्प ले रहे हैं।
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