कंटाप
NEWS
गुरुवार, 22 अक्तूबर 2026
Follow Us
ब्रेकिंग
PM बोले-कुछ लोग विदेशों में भारत को बदनाम कर रहे: कांग्रेस कब तक अपने फेल प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश क...      मुझे गालियां पड़ेंगी, लेकिन...; योगेंद्र यादव ने कहा- अभी मोदी का इस्तीफा नहीं चाहते लोग      सऊदी अरब में दो बांग्लादेशियों को मौत की सज़ा दिए जाने से जुड़े वे सवाल जो हैं अनसुलझे      Rain Alert: बन गया है कम दबाव का क्षेत्र, इन राज्यों में होने जा रही मूसलाधार बारिश, आंधी तूफान का भी अलर्ट      Tiger Shroff Attack Case में बड़ा खुलासा, वारदात से पहले शूटरों ने की थी बंदूक चलाने की प्रैक्टिस, हुआ था म      'पाकिस्तान को अलग-थलग नहीं कर सकता भारत', मार्को रुबियो के बयान पर बोले पाकिस्तानी डिफेंस एक्सपर्ट      सोनम वांगचुक का केंद्र पर आरोप, बोले- लद्दाख से किए वादे पूरे करे सरकार      AIIMS से डीम्ड यूनिवर्सिटीज तक... NEET UG काउंसलिंग के बाद क्यों खाली रह गईं MBBS सीटें?     
SENSEX लोड हो रहा... | NIFTY लोड हो रहा... | GOLD (10g) ₹— | SILVER (10g) ₹— | USD/INR ₹— | CRUDE OIL $— | Uttar Pradesh — लोड हो रहा है | --:--:-- | लाइव अपडेट
@NewsKantap:
धर्म

स्कंदमाता की आराधना: सीतापुर में मां के इस पावन स्वरूप का हुआ पूजन और मांगा आशीष

सीतापुर जिले में धार्मिक अनुष्ठानों के क्रम में स्कंदमाता के पावन स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर भक्तों ने माता के दरबार में हाजिरी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की और विधि-विधान से आशीर्वाद प्राप्त किया।

A
Ankit Yadav
17 अक्ट 2026, 15:44
स्कंदमाता की आराधना: सीतापुर में मां के इस पावन स्वरूप का हुआ पूजन और मांगा आशीष

स्कंदमाता के स्वरूप का पूजन

सीतापुर जिले के अंतर्गत धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप यानी स्कंदमाता की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस पावन अवसर पर विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिली। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां के इस रूप का आह्वान किया और हवन-पूजन के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया। भक्तों ने माता को पुष्प, फल, रोली और अक्षत अर्पित किए। इस दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और देवी के जयकारों से क्षेत्र गूंज उठा। महिलाओं और युवाओं ने भी इस धार्मिक अनुष्ठान में पूरी श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया और मां के चरणों में अपनी हाजिरी लगाई। स्थानीय स्तर पर इस पूजन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि देवी के इस रूप की उपासना से ज्ञान, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर कोई माता की एक झलक पाने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा था। इस आयोजन ने पूरे इलाके में एक सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है।

भक्तों द्वारा मांगा गया आशीष

पूजन के दौरान सीतापुर में एकत्रित हुए श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता से अपने परिवार की सुख-शांति और कल्याण के लिए विशेष प्रार्थना की। लोगों ने दीपक जलाकर माता की आरती उतारी और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आशीर्वाद मांगा। मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं ने अनुशासन का पालन करते हुए अपनी बारी का इंतजार किया और शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन किए। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान स्थानीय आयोजन समितियों ने भी आने वाले भक्तों के लिए पानी और बैठने की उचित व्यवस्था की थी। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक सभी में माता की आराधना को लेकर भारी उत्साह नजर आ रहा था। लोगों का मानना है कि सच्चे मन से की गई मां स्कंदमाता की उपासना सभी प्रकार के दुखों और कष्टों का नाश करती है। संतानों के अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए भी माताओं ने विशेष रूप से प्रार्थनाएं कीं। पूजा के उपरांत प्रसाद का वितरण किया गया जिसे सभी ने बड़े ही आदर के साथ ग्रहण किया। इस प्रकार यह पूरा धार्मिक कार्यक्रम पूरी आस्था, अनुशासन और पारंपरिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

धार्मिक महत्व और परंपराएं

सनातन संस्कृति में नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा करने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है। इसी धार्मिक परंपरा के तहत सीतापुर में स्कंदमाता के पूजन का आयोजन किया गया जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, और उनकी गोद में बाल रूप में कार्तिकेय जी विराजमान रहते हैं। इस स्वरूप की उपासना करने से भक्तों को सूर्यमंडल के समान अलौकिक तेज और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और प्राचीन मान्यताओं से जोड़ने के लिए ऐसे अनुष्ठान बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जिला स्तर पर होने वाले इन आयोजनों से स्थानीय बाजारों में भी रौनक बढ़ जाती है और लोग पर्वों को मिलजुलकर मनाते हैं। इस प्रकार स्कंदमाता का यह पूजन कार्यक्रम अपनी पारंपरिक गरिमा को बनाए रखते हुए सफलताપૂર્વक संपन्न हुआ और इसने सभी के जीवन में सकारात्मकता का संदेश दिया है।

कंटाप
NEWS
होम 🇮🇳 देश 🗺️ राज्य 🌍 विदेश 🏛️ राजनीति 💼 व्यापार 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 💻 टेक्नोलॉजी 🏥 स्वास्थ्य 📚 शिक्षा 🕉️ धर्म वीडियो राशिफल खोज