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धर्म

उत्सव की उमंग: कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा के स्वागत में पूरी तरह तैयार है जयपुर

जयपुर में कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। शहर के सभी प्रमुख मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है और कान्हा के स्वागत के लिए गुलाबी नगरी के वासी पूरी तरह तैयार हैं।

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Ankit Yadav
04 सित 2026, 14:18
उत्सव की उमंग: कृष्ण जन्माष्टमी पर कान्हा के स्वागत में पूरी तरह तैयार है जयपुर
श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व आज देश भर के साथ-साथ राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर गुलाबी नगरी के कोने-कोने में एक अलग ही आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रौनक देखने को मिल रही है। शहर के तमाम छोटे-बड़े मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक फूलों और पारंपरिक झांकियों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया है। भक्तों के उत्साह और उमंग का यह आलम है कि सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है और हर कोई अपने आराध्य बाल गोपाल के दर्शन पाने के लिए बेहद उत्सुक नजर आ रहा है।

ऐतिहासिक मंदिरों में विशेष तैयारियां और सजावट

शहर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिरों, विशेषकर आराध्य देव गोविंद देव जी के मंदिर और अन्य वैष्णव पीठों में जन्माष्टमी के इस पावन पर्व को लेकर महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं। आज के दिन इन पवित्र स्थलों पर विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव यानी मध्य रात्रि के बारह बजते ही महाआरती का आयोजन होगा, जिसके साक्षी बनने के लिए हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक और दूर-दूर से आए श्रद्धालु मंदिर परिसर में इकट्ठा होने लगे हैं। सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी चाक-चौबंद किया गया है ताकि आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। घरों से लेकर बाजारों तक में उत्सव का एक अभूतपूर्व माहौल बना हुआ है। बाजारों में पूजा-सामग्री, बाल गोपाल के नए वस्त्र, मुकुट, बांसुरी और सुंदर पालनों की खरीदारी करने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। महिलाओं और बच्चों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह है। घरों में लोग अपने मंदिरों को विशेष रूप से सजा रहे हैं और मध्य रात्रि में होने वाले नंदोत्सव व पंचामृत अभिषेक की तैयारियों में जुटे हुए हैं। पारंपरिक व्यंजनों और मिठाइयों की खुशबू से हर घर महक उठा है, जो इस त्योहार की मिठास को और अधिक बढ़ा रहा है। सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से जयपुर में जन्माष्टमी का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि शहर की साझी संस्कृति और गहरी आस्था का प्रतीक बन चुका है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों ने मिलकर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं ताकि रात के समय होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में उमड़ने वाली भारी भीड़ को आसानी से नियंत्रित किया जा सके। इस प्रकार, गुलाबी नगरी का हर एक वासी भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप के स्वागत में पलकें बिछाए बैठा है और पूरा शहर भक्ति के सागर में सराबोर नजर आ रहा है।
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