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विश्व संस्कृत दिवस पर जोरहाट में गूंजे संस्कृत के श्लोक और मंत्र, प्राचीन भाषा को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने का लिया गया सामूहिक संकल्प
असम के जोरहाट में विश्व संस्कृत दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां गूंजते हुए श्लोकों के बीच इस प्राचीन भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण संकल्प लिया गया।
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Ankit Yadav
29 अग 2026, 12:27
भारतीय संस्कृति और प्राचीन परंपराओं के संवाहक पर्व के रूप में जाने जाने वाले विश्व संस्कृत दिवस के मौके पर असम के जोरहाट क्षेत्र में एक अत्यंत उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक माहौल देखने को मिला। स्थानीय आयोजनों के दौरान संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोकों और मंत्रों की गूंज से पूरा इलाका सांस्कृतिक रंग में रंग गया। इस खास अवसर पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और भाषा प्रेमियों ने हिस्सा लिया और अपनी माटी से जुड़ी इस महान विरासत को संजोने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह सामूहिक संकल्प था जिसके तहत इस प्राचीन भाषा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर इसे राज्य के दूरदराज के गांवों और आम बस्तियों तक प्रभावी रूप से प्रसारित करने की बात कही गई।
संस्कृत भाषा का महत्व और वर्तमान परिप्रेक्ष्य
आधुनिक दौर में जहां कई भाषाएं अपनी पहचान खोती जा रही हैं, वहीं संस्कृत जैसी वैज्ञानिक और समृद्ध भाषा का प्रचार-प्रसार आज के समय में बेहद प्रासंगिक माना जाता है। विशेषज्ञों और वक्ताओं ने इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत न केवल भारत की बल्कि पूरे विश्व की प्राचीनतम धरोहरों में से एक है, जिसमें विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा और नैतिकता का अगाध भंडार छिपा हुआ है। जोरहाट में आयोजित इन विशेष सत्रों के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए संस्कृत के अध्ययन को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। जब तक युवा वर्ग इस भाषा के व्याकरण, साहित्य और इसके गहन दर्शन से परिचित नहीं होगा, तब तक हमारी सांस्कृतिक निरंतरता पूरी तरह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
विभिन्न आयोजनों में भाग लेने वाले युवाओं और विद्यार्थियों ने भी बढ़-चढ़कर अपनी प्रस्तुतियां दीं, जिसमें संस्कृत भाषा में भाषण, श्लोक उच्चारण और संवाद कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन शामिल था। स्थानीय गुरुओं और शिक्षकों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है और लोगों के मन से संस्कृत के प्रति यह भ्रांति दूर होती है कि यह एक कठिन या मृत भाषा है। इसके विपरीत, यह एक जीवंत धारा है जो हमारे अतीत को हमारे भविष्य से जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है।
भविष्य की योजनाएं और जन-जन तक पहुंच
जोरहाट के इन कार्यक्रमों के समापन पर यह रूपरेखा तैयार की गई कि आने वाले महीनों में विभिन्न ग्रामीण अंचलों में विशेष कार्यशालाएं और शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य गांव-गांव के बच्चों और गृहणियों को भी संस्कृत के बुनियादी ज्ञान से परिचित कराना होगा ताकि वे दैनिक जीवन में इसके छोटे-छोटे वाक्यों और श्लोकों का उपयोग कर सकें। आयोजकों का मानना है कि जब तक भाषा grassroots level यानी जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचेगी, तब तक इसके पुनरुत्थान का उद्देश्य अधूरा रहेगा। इस सफल आयोजन ने न केवल स्थानीय निवासियों को गौरवान्वित किया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की एक नई अलख जगा दी है, जिसके दूरगामी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।