शारदीय नवरात्रि की तिथियां और उत्तर भारत की परंपराएं
सनातन परंपरा के अनुसार शारदीय नवरात्रि का पर्व इस साल 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। इसके ठीक अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में कुल चार नवरात्रि आती हैं जिनमें शारदीय नवरात्रि को सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ देवी मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत का पालन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मनुष्यों के सभी प्रकार के दुख, दर्द और कष्ट दूर हो जाते हैं। उत्तर भारत की बात करें तो यहां इन दिनों में छोटी कन्याओं को घर बुलाकर भोजन कराने और उनका पूजन करने की परंपरा का विशेष रूप से निर्वाह किया जाता है। इसके अलावा उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में पंडालों के भीतर दुर्गा मां की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है और नौ दिनों तक पूरे विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। पंजाब और जम्मू-कश्मीर के इलाकों में नवरात्रि के पावन अवसर पर रात्रि के समय माता के जागरण का आयोजन करने की पुरानी परंपरा है। इन आयोजनों के दौरान श्रद्धालु रात भर बैठकर भक्ति संगीत, भजन-कीर्तन करते हैं और मां की आराधना में लीन रहते हैं।
पश्चिम बंगाल से लेकर गुजरात और तेलंगाना तक के अनोखे उत्सव
भारत के पूर्वी राज्यों में शारदीय नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा का बहुत बड़ा और भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है। पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, ओडिशा और त्रिपुरा में भी दुर्गा पूजा की पारंपरिक रस्में बड़े पैमाने पर निभाई जाती हैं। इन सभी राज्यों में पंडालों के अंदर दुर्गा मां की विशाल मिट्टी की सुंदर मूर्तियां स्थापित की जाती हैं और उत्सव के समापन पर उनका विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। दूसरी ओर पश्चिमी राज्य गुजरात में नवरात्रि का मुख्य आकर्षण पारंपरिक गरबा और डांडिया नृत्य है। गुजरात में लोग शाम के समय एक साथ मिलकर पंडालों में गरबा खेलते हैं और इस उत्सव को पूरी ऊर्जा के साथ मनाते हैं। दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में नवरात्रि के दौरान बथुकम्मा उत्सव मनाने की अनूठी परंपरा है। इस उत्सव में महिलाएं तरह-तरह के सुंदर फूलों को एक गोल आकार में सजाती हैं और फिर उन फूलों के चारों तरफ घेरा बनाकर पारंपरिक गीत गाती हैं तथा नृत्य करती हैं। इस उत्सव के अंतिम दिन इन सभी फूलों को किसी साफ पानी के स्रोत में प्रवाहित कर दिया जाता है। इसी प्रकार तमिलनाडु राज्य में शारदीय नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के दौरान घरों में पारंपरिक तरीके से गुड़िया सजाने की सुंदर परंपरा निभाई जाती है।
कर्नाटक और केरल में विजयदशमी व विद्यारंभ के विशेष आयोजन
कर्नाटक राज्य में शारदीय नवरात्रि और विजयदशमी का पर्व बहुत ही ऐतिहासिक और भव्य तरीके से मनाया जाता है। इस अवसर पर मैसूर शहर में प्रसिद्ध मैसूर दशहरा उत्सव का आयोजन किया जाता है। इस भव्य उत्सव के दौरान देवी चामुंडेश्वरी की पवित्र मूर्ति को एक बेहद खूबसूरती से सजाए गए हाथी की पीठ पर विराजमान किया जाता है और पूरे शहर में जंबू सवारी का एक विशाल जुलूस निकाला जाता है। वहीं दक्षिण के ही एक अन्य राज्य केरल में नवरात्रि के आखिरी तीन दिनों के दौरान विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा-अर्चना करने का विधान है। केरल में इस दौरान लोग अपनी पढ़ने-लिखने की किताबें और पेन को देवी मां की मूर्ति के सामने आदरपूर्वक रखते हैं। इसके बाद ठीक विजयादशमी के पावन दिन बच्चों के विद्यारंभ की प्राचीन परंपरा को निभाया जाता है। इस खास दिन पर छोटे बच्चों की औपचारिक शिक्षा की शुरुआत कराई जाती है जो उनके भविष्य की नींव रखती है। देश के विभिन्न अंचलों में मनाई जाने वाली ये तमाम परंपराएं भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी समृद्ध विरासत को दर्शाती हैं। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के इन सभी आयोजनों का समापन अंततः देवी मां की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ ही पूरा होता है।