पितृ विसर्जन अवकाश को लेकर चर्चा और सवाल
उत्तर प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में इन दिनों पितृ विसर्जन के अवसर पर अवकाश घोषित किए जाने की संभावना पर व्यापक चर्चा चल रही है। राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में माता-पिता और विद्यार्थियों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस विशेष तिथि पर शैक्षणिक कार्य बंद रहेंगे या नहीं। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों और लोगों की जिज्ञासा के बाद शिक्षा विभाग के कैलेंडर और नियमों की नए सिरे से समीक्षा की जा रही है। हर साल पखवाड़े के समापन पर आने वाले पितृ विसर्जन के दिन परंपराओं का पालन करने के लिए लोग अवकाश की मांग करते आए हैं। इस विषय पर अभी तक किसी बड़े प्रशासनिक या शासन स्तर के आदेश की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, जिसके कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक संघ और छात्र संगठनों से जुड़े लोग भी इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग कर रहे हैं ताकि किसी प्रकार की दुविधा न रहे। विद्यालयों में आने वाले दिनों में छुट्टियों के प्रबंधन को लेकर प्रशासन की ओर से कोई नया परिपत्र जारी किया जा सकता है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए लोग लगातार पंचांग और छुट्टियों की आधिकारिक सूची की जांच कर रहे हैं ताकि उन्हें सही जानकारी मिल सके।
स्कूल कैलेंडर और सरकारी छुट्टियों के नियम
राज्य के बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों द्वारा हर साल शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले एक विस्तृत अवकाश कैलेंडर जारी किया जाता है। इस आधिकारिक कैलेंडर में ग्रीष्मकालीन अवकाश, शीतकालीन अवकाश और विभिन्न राष्ट्रीय तथा धार्मिक त्योहारों की सूचियां पहले से ही निर्धारित कर दी जाती हैं। नियमों के अनुसार कोई भी विद्यालय कैलेंडर में शामिल छुट्टियों के अलावा अपनी मर्जी से किसी विशेष दिन संस्थान बंद नहीं रख सकता है। यदि किसी नए अवकाश को शामिल किया जाना होता है, तो उसके लिए शासन स्तर से विशेष अनुमति या आदेश की आवश्यकता होती है। पितृ विसर्जन जैसे अवसरों पर पारंपरिक रूप से अवकाश घोषित करने की कोई पुरानी व्यवस्था सामान्यतः बेसिक शिक्षा परिषद के कैलेंडर में नहीं पाई जाती है। पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय स्तर पर कुछ संस्थानों ने अपने स्तर पर निर्णय लिए हैं, लेकिन राज्यव्यापी स्तर पर ऐसा कोई अनिवार्य नियम लागू नहीं है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय या बेसिक शिक्षा अधिकारी के पास ऐसे विषयों पर दिशा-निर्देश मांगने के लिए कई बार स्थानीय स्तर से आवेदन भी भेजे जाते हैं। कैलेंडर के नियमों के अंतर्गत आने वाले पर्वों की सूची में गजेटेड और निर्बंधित अवकाशों का स्पष्ट वर्गीकरण किया जाता है, जिसके तहत ही पूरे वर्ष भर की शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होती हैं।
शैक्षणिक व्यवस्था और छात्रों की पढ़ाई पर प्रभाव
विद्यालयों में छुट्टियों की संख्या बढ़ने से सीधे तौर पर छात्रों के पाठ्यक्रम की पढ़ाई और शैक्षणिक सत्र की समय-सारणी पर प्रभाव पड़ता है। शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य निर्धारित दिनों के भीतर पाठ्यक्रम को पूरा करना और समय पर परीक्षाओं का आयोजन कराना होता है। यदि कैलेंडर में किसी नए अवकाश को जोड़ा जाता है, तो उस छूटे हुए कार्य दिवस की भरपाई के लिए अन्य किसी कार्यदिवस पर कक्षाएं चलानी पड़ सकती हैं। अभिभावकों और शिक्षाविदों का एक वर्ग मानता है कि त्योहारों और परंपराओं के निर्वहन के लिए अवकाश जरूरी हैं, जबकि दूसरा वर्ग पढ़ाई के नुकसान को लेकर चिंतित रहता है। वर्तमान परिदृश्य में जब पितृ विसर्जन पर अवकाश को लेकर चर्चा हो रही है, तो अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि इससे बच्चों की पढ़ाई का कितना नुकसान हो सकता है। भविष्य में यदि इस संबंध में कोई नीतिगत बदलाव किया जाता है, तो उसका असर प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों और शिक्षकों पर पड़ेगा। सभी पक्षों की राय को ध्यान में रखते हुए ही शिक्षा विभाग किसी भी प्रकार के नए अवकाश को जोड़ने या पुराने नियमों को यथावत बनाए रखने का अंतिम निर्णय लेता है। फिलहाल इस मामले में शासन स्तर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है ताकि सभी भ्रम दूर हो सकें।