अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जागरूकता अभियान का आयोजन
अंतर अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के पावन अवसर पर महिला ग्रामोद्योग सेवा समिति नामक संगठन द्वारा ग्रामीण महिला सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। यह पूरा आयोजन परियोजना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में किशोरियों के बीच संपन्न हुआ जिसमें बड़ी संख्या में बालिकाओं ने हिस्सा लिया। इस पहल का मूल उद्देश्य समाज की इन युवा वर्ग बालिकाओं को उनकी शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति गंभीर बनाना था। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि समाज में उन्हें समानता और सुरक्षा का पूरा अधिकार मिलना चाहिए। संस्था के प्रतिनिधियों ने बालिकाओं को समाज की एक बेहद महत्वपूर्ण और शक्तिशाली इकाई बताया। कार्यक्रम के दौरान यह बात जोर देकर समझाई गई कि लड़कों की तरह ही लड़कियों को भी जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। वक्ताओं ने समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों और भेदभाव को जड़ से मिटाने की बात कही। इसमें मुख्य रूप से बाल विवाह और लैंगिक असमानता जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया जिनके खिलाफ लड़ने में हर नागरिक की अहम जिम्मेदारी बनती है। बालिकाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय या हिंसा को समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने का संकल्प दिलाया गया ताकि एक सुरक्षित माहौल तैयार हो सके।
कम्पोजिट विद्यालय में अधिकारियों और शिक्षकों का मार्गदर्शन
मुहम्मदाबाद गोहना स्थित कम्पोजिट विद्यालय टंडवा चौबेपुर के प्रांगण में एक भव्य जागरूकता सत्र का संचालन किया गया। इस विशेष बैठक की संयुक्त अध्यक्षता पुलिस विभाग के उपनिरीक्षक और राज्य संदर्भ समूह के सदस्य संजय कुमार तिवारी द्वारा मिलकर की गई। इस सत्र के दौरान स्कूल की छात्राओं के साथ वक्ताओं ने बहुत ही प्रेरणादायी और अर्थपूर्ण संवाद स्थापित किया। पुलिस विभाग से जुड़ी उपनिरीक्षक माधुरी सागर ने छात्राओं को महिला तथा बालिका सुरक्षा से जुड़े तमाम कानूनी प्रावधानों की बहुत ही बारीकी से जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को अपनी आत्मरक्षा के विभिन्न उपायों से अवगत कराया ताकि वे किसी भी मुसीबत के समय खुद का बचाव कर सकें। आज के डिजिटल युग को ध्यान में रखते हुए साइबर अपराधों से किस तरह बचना है इस पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विपरीत और कठिन परिस्थितियों में किस प्रकार साहस के साथ सही फैसले लिए जाएं इस विषय पर भी पुलिस अधिकारी ने छात्राओं का मार्गदर्शन किया। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय परिवार और शिक्षा विभाग के कई प्रतिष्ठित लोग सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। इनमें नोडल शिक्षक संकुल संतोष कुमार सिंह और विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरिलाल यादव की उपस्थिति प्रमुख रही। इसके अलावा भूपेन्द्र प्रताप सिंह, रामप्रवेश यादव, सुश्री सदफ यासमीन और मुहम्मद अहमर जैसे शिक्षाविदों ने भी अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कार्यक्रमों में पूरा सहयोग प्रदान किया और छात्राओं का हौसला बढ़ाया।
शिक्षा जारी रखने और अधिकारों के प्रति सचेत रहने की सलाह
आयोजित किए गए इन सभी जागरूकता कार्यक्रमों का एक बड़ा हिस्सा बालिकाओं को उनकी पढ़ाई बीच में न छोड़ने के लिए प्रेरित करना था। किशोरियों को स्पष्ट शब्दों में समझाया गया कि वे अपनी शिक्षा को किसी भी परिस्थिति में निरंतर जारी रखें और अपने अंदर के आत्मविश्वास को लगातार बढ़ाएं। उन्हें अपने सभी कानूनी और सामाजिक अधिकारों को भली-भांति समझने की सलाह दी गई ताकि कोई उनका शोषण न कर सके। यदि किसी भी बालिका को जीवन में कभी भी कोई समस्या या परेशानी आती है तो उसे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने परिवार के सदस्यों, अपने शिक्षकों और सरकार द्वारा चलाई जा रही संबंधित सहायता सेवाओं से तुरंत संपर्क कर सहयोग लेना चाहिए। यह बात बार-बार दोहराई गई कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ा हथियार है जो बालिकाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकता है। जब लड़कियां पढ़लिखकर आगे बढ़ेंगी तभी एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज की कल्पना को जमीन पर उतारा जा सकेगा। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की किशोरियों में एक नया उत्साह और आत्मविश्वास देखने को मिला। अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा दी गई इन महत्वपूर्ण जानकारियों से बालिकाओं और उनके अभिभावकों में जागरूकता का स्तर काफी ऊंचा उठा है जिससे आने वाले समय में सकारात्मक बदलाव आने की पूरी उम्मीद बंधती है।