स्कूल डेटा अपडेशन में गंभीर लापरवाही
बड़वानी जिले के शैक्षणिक संस्थानों के डेटा को अपडेट करने की प्रक्रिया में भारी सुस्ती देखी गई है जिस पर राज्य शिक्षा केंद्र ने नाराजगी जताई है। संचालक हरजिंदर सिंह ने बताया कि जिले में यूडीआईएसई यानी एकीकृत जिला सूचना प्रणाली की प्रगति बेहद धीमी है और इसे जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से भारी लापरवाही माना जा रहा है। इस कार्य को लेकर जारी किए गए निर्देशों का पालन करने में भारी चूक हुई है जो विभागीय कामकाज के लिए गंभीर विषय है। केंद्र की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा क्षेत्र में नामांकन और अन्य विवरण समय पर ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य है। इस पूरी कवायद में बड़वानी जिले का पिछड़ना अधिकारियों के लिए चिंता का कारण बन गया है और इसे उच्च स्तर पर नियमों की अनदेखी माना जा रहा है। अब जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी को सात दिनों के भीतर अपने काम की धीमी रफ्तार के पीछे की ठोस वजह स्पष्ट करने का कड़ा निर्देश दिया गया है।
नामांकन और प्रोफाइल एंट्री के आंकड़े
वर्ष 2026-27 के शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों के नामांकन की स्थिति वर्ष 2025-26 के मुकाबले कमतर रही है जो प्रशासनिक आंकड़ों में स्पष्ट दिखाई देती है। पिछले सत्र में कुल 2,82,274 विद्यार्थी दर्ज थे जबकि चालू सत्र में यह आंकड़ा घटकर 2,63,072 तक सीमित रह गया है। इस प्रकार 19,202 विद्यार्थियों के नामांकन का बड़ा अंतर अभी भी लंबित बना हुआ है जिसे भरने के लिए कड़े प्रयास होने चाहिए थे। इसके अतिरिक्त छात्रों के प्रोफाइल अपडेशन की गति भी काफी संतोषजनक नहीं रही है। कुल 2,81,895 विद्यार्थियों के प्रोफाइल में से केवल 1,32,721 का कार्य ही पूरा किया गया है जो कुल प्रगति का मात्र 53 फीसदी है। स्कूलों की जानकारी के मामले में भी स्थिति बेहतर नहीं है और कुल 2,948 स्कूलों में से 804 स्कूलों का डेटा अभी भी पोर्टल पर नहीं चढ़ाया गया है।
कार्रवाई की चेतावनी और भविष्य की राह
केंद्र सरकार ने सभी जिलों को 31 अगस्त 2026 तक शत-प्रतिशत नामांकन की प्रक्रिया को पूरा करने का कड़ा लक्ष्य दिया था लेकिन बड़वानी जिले ने इस समय सीमा का उल्लंघन किया है। राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे सिविल सेवा नियमों के सीधे तौर पर खिलाफ माना है और इसे कर्तव्यों के निर्वहन में बड़ी चूक बताया है। समन्वयक को दिए गए नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि उन्हें सात दिनों के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। यदि निर्धारित समय अवधि में समन्वयक की ओर से कोई उत्तर नहीं मिलता है तो प्रशासन की तरफ से एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इस प्रकार की लापरवाही से जिले के शैक्षणिक डेटा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और भविष्य की योजनाओं में बाधा उत्पन्न होती है। प्रशासनिक स्तर पर यह चेतावनी स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले हर अधिकारी को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहना होगा अन्यथा उन्हें भविष्य में सख्त परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।