माध्यमिक शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई
भारत सरकार की तरफ से विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग अभियान का संचालन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण योजना के अंतर्गत स्कूलों को पोर्टल पर अपनी पूरी जानकारी दर्ज करनी थी। लेकिन जिले के कई संस्थानों ने इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की रुचि नहीं दिखाई। इसी लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कुल 300 निजी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। इसके अलावा जिन सरकारी माध्यमिक विद्यालयों ने अपना पंजीकरण कार्य समय पर पूरा नहीं कराया, उनके खिलाफ भी कड़े कदम उठाए गए हैं। विभाग ने ऐसे 31 राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अधिकारियों का साफ कहना है कि शासन की इस महत्वकांक्षी योजना में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित संस्थानों को जल्द से जल्द अपनी रिपोर्टिंग का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके और विद्यालयों की सही स्थिति सामने आ सके।
जिला विद्यालय निरीक्षक और बीएसए के निर्देश
जिला विद्यालय निरीक्षक अजीत सिंह ने मान्यता प्राप्त विद्यालयों, अशासकीय संस्थानों और मदरसा विद्यालयों के सभी प्रधानाध्यापकों को चेतावनी दी है। उन्होंने साफ निर्देश दिए हैं कि अभियान से जुड़े सभी अधूरे कार्यों को तुरंत पूरा किया जाए। इस बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र त्रिपाठी ने भी निजी तथा परिषदीय स्कूलों के मुखियों को अपना पंजीकरण शीघ्र पूरा करने के सख्त आदेश दिए हैं। कुछ संस्थानों से ऐसी बातें भी सामने आई हैं कि तकनीकी समस्याओं की वजह से पोर्टल पर रिपोर्टिंग करने में कुछ देरी हुई है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल तकनीकी बहाने से काम में लापरवाही को माफ नहीं किया जाएगा। विभाग लगातार इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी कर रहा है और सभी संस्थानों से तय समयसीमा के भीतर अपनी सभी गतिविधियों की तस्वीरें और डेटा पोर्टल पर अपलोड करने की अपील की जा रही है। अधिकारियों के इन तेवरों से जिले के तमाम शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है और सभी लोग पोर्टल पर अपना डेटा सही करने में जुट गए हैं।
स्पष्टीकरण न मिलने पर मान्यता पर लटकी तलवार
विभाग की ओर से जारी किए गए नोटिस में यह कड़ी चेतावनी भी दी गई है कि यदि इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे। ऐसे लापरवाह संस्थानों के प्रबंधकों और प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उनके खिलाफ सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित विद्यालय की मान्यता रद्द करने यानी प्रत्याहरण और यू-डायस कोड निरस्त करने की संस्तुति भी उच्चाधिकारियों को भेजी जा सकती है। इस पूरे अभियान का मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों के भीतर स्वच्छता, साफ-सफाई और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है। इसके तहत परिसरों में जल की उपलब्धता, शौचालय की स्थिति, साबुन से हाथ धोने की व्यवस्था, स्कूल के रखरखाव और व्यवहार में बदलाव से जुड़ी जानकारियां साझा करनी होती हैं। साथ ही मिशन लाइफ से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के फोटोग्राफ भी पोर्टल पर अपलोड करने का नियम है। इसी डेटा और रिपोर्टिंग के आधार पर अंततः स्कूलों को रेटिंग प्रदान की जाती है, जिससे संस्थानों की गुणवत्ता का आकलन होता है।