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शिक्षा

छात्र प्रदर्शन: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सरायख्वाजा थाना प्रभारी के दुर्व्यवहार पर बवाल और धरना

वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में छात्र वालंटियरों ने सरायख्वाजा थाना प्रभारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। कुलपति कार्यालय का घेराव करने के बाद छात्रों ने जौनपुर प्रीमियर लीग की ट्रॉफी को घेर लिया था। बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के भरोसे के बाद यह विरोध समाप्त हुआ।

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Ankit Yadav
15 अक्ट 2026, 13:36
छात्र प्रदर्शन: वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में सरायख्वाजा थाना प्रभारी के दुर्व्यवहार पर बवाल और धरना

कुलपति कार्यालय का घेराव और वालंटियरों के गंभीर आरोप

बुधवार के दिन वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर के भीतर एक बड़ा हंगामा देखने को मिला जब छात्र वालंटियरों ने सरायख्वाजा थाना प्रभारी पर गंभीर दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। जौनपुर प्रीमियर लीग के समापन से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम से विद्यार्थियों में भारी असंतोष फैल गया था। वालंटियर इशविका सिंह ने यह साफ तौर पर आरोप लगाया कि शाम करीब पांच बजे के समय सरायख्वाजा थाना प्रभारी राजेश कुमार सिंह ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और धक्का-मुक्की भी की। इस घटना से बेहद नाराज होकर विद्यार्थी खेल स्टेडियम से बाहर निकल आए और सीधे कुलपति कार्यालय की तरफ बढ़ गए। छात्रों ने कार्यालय के सामने पहुंचकर जमकर नारेबाजी शुरू कर दी और पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपना कड़ा रोष व्यक्त किया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश कुमार सिंह तुरंत मौके पर पहुंचे और छात्रों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। उन्होंने विद्यार्थियों की बात को ध्यान से सुना और उनकी पूरी शिकायत को समझा, लेकिन छात्र अपनी जिद पर अड़े रहे। छात्रों की केवल एक ही प्रमुख मांग थी कि पुलिस अपनी इस गलती को पूरी तरह स्वीकार करे। काफी लंबी बातचीत और तमाम प्रयासों के बाद भी जब दोनों पक्षों के बीच किसी प्रकार की सहमति नहीं बन पाई, तो विद्यार्थियों ने आक्रोशित होकर जौनपुर प्रीमियर लीग की मुख्य ट्रॉफी को अपने घेरे में ले लिया।

पूर्व आईएएस और कुलपति के हस्तक्षेप से खत्म हुआ विरोध

जब विद्यार्थियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच काफी देर तक चली वार्ता किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, तब स्थिति को संभालने के लिए उच्च स्तर पर प्रयास किए गए। खेल आयोजन से जुड़ी जौनपुर प्रीमियर लीग की ट्रॉफी को छात्रों द्वारा घेरे जाने के बाद प्रबंधन में हलचल बढ़ गई थी। इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच विश्वविद्यालय के कुलपति राकेश कुमार सिंह और पूर्व आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से बातचीत की। दोनों अधिकारियों ने विद्यार्थियों को पूरी बात समझाते हुए उन्हें आवश्यक आश्वासन दिए। अधिकारियों की ओर से मिले इन भरोसे के बाद आखिरकार छात्रों का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अपना प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया। इसके तुरंत बाद विद्यार्थियों ने जौनपुर प्रीमियर लीग की वह विवादित ट्रॉफी विधिवत रूप से आयोजकों के सुपुर्द कर दी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य अधिकारी भी सतर्क नजर आए। छात्रों ने अधिकारियों के इस आश्वासन को स्वीकार किया कि उनकी शिकायतों को पूरी गंभीरता से लिया जाएगा। पूर्व आईएएस अभिषेक सिंह और कुलपति राकेश कुमार सिंह की मध्यस्थता इस पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने में मुख्य रूप से कारगर साबित हुई। अधिकारियों द्वारा दिए गए ठोस आश्वासनों के कारण ही विश्वविद्यालय परिसर में चल रहा यह तीखा विरोध प्रदर्शन बिना किसी बड़े उपद्रव के सफलतापर्वक समाप्त हो गया और स्थिति सामान्य हो सकी।

कुलपति का बड़ा भरोसा और भविष्य के लिए कड़े निर्देश

छात्रों के प्रदर्शन के पूरी तरह समाप्त होने के बाद कुलपति राकेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के भविष्य के आयोजनों को लेकर कई महत्वपूर्ण और कड़े आश्वासन दिए। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को यह पूरा भरोसा दिलाया कि भविष्य में विश्वविद्यालय के भीतर आयोजित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में विद्यार्थियों को हमेशा पूरी प्राथमिकता दी जाएगी। कुलपति ने बहुत कड़े शब्दों में यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने छात्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण की पूरी जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी ताकि उचित कदम उठाए जा सकें। सरायख्वाजा थाना प्रभारी द्वारा कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार और धक्का-मुक्की के मामले ने विश्वविद्यालय स्तर पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है। जौनपुर प्रीमियर लीग के समापन के अवसर पर हुई इस अप्रत्याशित घटना से छात्र समुदाय और पुलिस प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए ठोस व स्पष्ट आश्वासनों के बाद छात्रों ने शांति का परिचय देते हुए अपना आंदोलन वापस ले लिया। इस प्रकार कुलपति और पूर्व आईएएस अधिकारी के संयुक्त प्रयासों से विश्वविद्यालय परिसर में उत्पन्न हुआ भारी गतिरोध समाप्त हो गया। प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनी ओर से हरसंभव कदम उठाने का संकेत दिया है जिससे छात्र संतुष्ट नजर आए।

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