वैश्विक स्तर पर मिला प्रतिष्ठित स्थान
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के शोधकर्ता डॉ. अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव ने पूरी दुनिया के बीच अपने संस्थान और पूर्वांचल का गौरव बहुत अधिक बढ़ा दिया है। उन्हें स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और एल्सेवियर की तरफ से जारी की जाने वाली दुनिया भर के सबसे प्रतिष्ठित और शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की विशेष सूची में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि उनके लगातार किए जा रहे कड़े शोध कार्यों का परिणाम है। वह भौतिकी और खगोल विज्ञान के बेहद महत्वपूर्ण विषय क्षेत्र के अंतर्गत लगातार अपना शोध कार्य पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। इस वैज्ञानिक को वर्ष 2023 के वार्षिक आंकड़ों के साथ-साथ वर्ष 2025 और 2026 के नवीनतम वार्षिक आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई इस खास सूची में भी प्रमुखता से स्थान मिला है। उनके इस शानदार चयन से पूरे विश्वविद्यालय परिसर के भीतर बेहद खुशी का माहौल बना हुआ है और सभी लोग गर्व महसूस कर रहे हैं।
शोध कार्य और वैश्विक रैंकिंग का विवरण
इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होने वाले वैज्ञानिक डॉ. अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव का मुख्य शोध क्षेत्र रासायनिक भौतिकी है और वह इसी विषय पर गहराई से कार्य कर रहे हैं। रासायनिक भौतिकी के इस विशिष्ट उपक्षेत्र के अंतर्गत उनकी वैश्विक रैंक 3394 दर्ज की गई है, जो एक बहुत ही सराहनीय आंकड़ा माना जाता है। इसके साथ ही इस सूची में उनकी समग्र वैश्विक रैंक 333016 के रूप में दर्ज की गई है। उनके अकादमिक प्रदर्शन को दर्शाने वाले पैमानों के अनुसार उनके शोध का एच-इंडेक्स छह है और उनका एचएम-इंडेक्स तीन दर्ज किया गया है। उनके इन सभी शोध कार्यों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरी तरह से सराहा गया है। विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों और अधिकारियों ने उन्हें इस बड़ी सफलता के लिए अपनी तरफ से हार्दिक बधाई दी है। संस्थान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए बल्कि पूरे विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
पुरस्कार और अकादमिक पृष्ठभूमि का सफर
वैज्ञानिक डॉ. अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव को इससे पहले भी कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें वर्ष 2023 के दौरान राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की ओर से युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किया गया था, जो उनके शुरुआती शोध कार्यों की बड़ी मान्यता थी। इसके ठीक बाद वर्ष 2024 में भारतीय विज्ञान अकादमी ने उन्हें अपने संस्थान के एसोसिएट के रूप में चुना था। इन सब बड़ी उपलब्धियों के अलावा वह लगातार पिछले दो वर्षों से अपने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट शोधकर्ता पुरस्कार से भी लगातार सम्मानित होते आ रहे हैं। उनके इन सभी अकादमिक सम्मानों ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने विषय के प्रति कितने समर्पित और गंभीर हैं। उनके इन लगातार मिल रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की वजह से गोरखपुर विश्वविद्यालय का नाम अकादमिक जगत में और अधिक ऊंचाइयों को छू रहा है तथा युवा शोधकर्ताओं को इससे बड़ी प्रेरणा मिल रही है।