स्कूली विद्यार्थियों की भागीदारी
राजधानी लखनऊ में शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक भव्य कौशल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में कुल चौबीस विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। इसके साथ ही आयोजित किए गए मार्गदर्शन महोत्सव में लगभग तीन सौ प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड लखनऊ के क्षेत्रीय अधिकारी सचिन ठाकुर ने उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने सभी छात्रों को व्यावहारिक दक्षताएं विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे खुद को बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी तरह तैयार रखें। प्रधानाचार्या शबनम सिंह ने सभी गणमान्य अतिथियों और दूर-दूर से आए प्रतिभागियों का स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि छात्र-छात्राओं के समग्र विकास के लिए कई तरह के कौशल बेहद आवश्यक हैं। उनके अनुसार रचनात्मक सोच और आलोचनात्मक चिंतन विद्यार्थियों की सफलता की नींव बनाते हैं। इसके अलावा उन्होंने समस्या समाधान करने की क्षमता और नेतृत्व कौशल को भी छात्र जीवन का अहम हिस्सा बताया।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र
मुख्य आयोजनों के बाद एक विशेष मार्गदर्शन सत्र का संचालन किया गया जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी की डीन प्रोफेसर शिल्पी वर्मा ने विद्यार्थियों को रोजगारपरक कौशल के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वक्ता राहुल जे. नायर ने छात्र-छात्राओं को एक सार्थक करियर चुनने के मार्ग बताए और महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। वेलनेस कोच ललिता रानी वज्जाला ने नवाचार के साथ-साथ डिजाइन थिंकिंग और समस्या समाधान के विषयों पर छात्रों का मार्गदर्शन किया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित विभिन्न मॉडलों और प्रोजेक्ट्स का विशेषज्ञों की एक टीम द्वारा मूल्यांकन किया गया। मूल्यांकन के तुरंत बाद एक प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के सामने अपनी कई जिज्ञासाएं रखीं। विशेषज्ञों ने सभी सवालों के संतोषजनक उत्तर दिए जिससे छात्रों की कई शंकाओं का समाधान हो सका। इस पूरी प्रक्रिया से बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हुआ और उनके भीतर नए विषयों को सीखने की ललक भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
भविष्य की जरूरतें और सीख
इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को किताबी ज्ञान के साथ-साथ जमीनी हकीकत से रूबरू कराना होता है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा प्राप्त कर लेना ही काफी नहीं माना जाता है। छात्रों के अंदर छिपी हुई रचनात्मकता को बाहर लाने के लिए ऐसे मंच बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लखनऊ के इस आयोजन में मिले मार्गदर्शन से बच्चों को अपने भविष्य के बारे में सोचने में मदद मिली। रोजगार से जुड़े कौशल और नवाचार की जानकारी पाकर छात्र आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो रहे हैं। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों के बीच इस प्रकार का तालमेल शैक्षणिक माहौल को और अधिक मजबूत बनाता है। विशेषज्ञों की सलाह और मूल्यांकन प्रक्रिया से विद्यार्थियों को अपनी कमियों को सुधारने का अवसर मिला। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि व्यावहारिक प्रशिक्षण और योग्य मार्गदर्शन से युवा किसी भी क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।