स्कूल पहुंचने का जोखिम भरा मार्ग
गोरखपुर जिले के अंतर्गत आने वाले एक ग्रामीण और शहरी सीमावर्ती क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने वाले नौनिहालों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। यहाँ के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे अपनी शिक्षा के प्रति समर्पण दिखाते हुए हर रोज अपनी जान जोखिम में डालकर संस्थान तक पहुँच रहे हैं। उनके आने-जाने का सामान्य रास्ता बेहद खराब स्थिति में है, जहाँ चारों तरफ पानी भरा हुआ रहता है। इस मार्ग पर पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं है और यह पूरी तरह से कच्चा रास्ता है जो बारिश या जलभराव के कारण दलदल में बदल जाता है। इन मासूम विद्यार्थियों को मजबूरन अपने बस्ते और जूते हाथ में लेकर या उन्हें बचाकर इस गंदे पानी और कीचड़ के बीच से पैदल ही गुजरना पड़ता है। इस प्रकार की गंभीर समस्या के कारण बच्चों के समय पर स्कूल पहुँचने में भी बाधा आती है और वे हर दिन भीषण असुविधा का सामना करते हैं। स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचे की यह बदहाली सीधे तौर पर छोटे बच्चों की सुरक्षा को खतरे में डाल रही है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अभिभावकों की बढ़ती गहरी चिंताएं
अपने जिगर के टुकड़ों को हर रोज इस प्रकार की जानलेवा और कष्टदायक यात्रा पर जाते देख माता-पिता के मन में हर पल डर और बेचैनी बनी रहती है। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि जब तक उनके बच्चे सुरक्षित घर वापस नहीं लौट आते, तब तक उनकी सांसें अटकी रहती हैं। पानी के भीतर छिपे गड्ढे, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा और फिसलने से चोट लगने का डर हर समय बना रहता है। कई बार छोटे बच्चे पानी के तेज बहाव या गहरे पानी में संतुलन खोकर गिर भी जाते हैं, जिससे उनकी किताबें और कॉपियाँ पूरी तरह खराब हो जाती हैं। माता-पिता ने इस विकट परिस्थिति को लेकर अपनी तीव्र नाराजगी और गहरी चिंता व्यक्त की है, लेकिन उनकी इस समस्या का कोई ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित परिवारों का यह भी मानना है कि यदि समय रहते इस रास्ते को ठीक नहीं किया गया, तो कोई बड़ी दुर्घटना भी घट सकती है। हर दिन बच्चों को इस दलदली और जलमग्न रास्ते से भेजना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव से गुजर रहा है।
बुनियादी शिक्षा और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता
शिक्षा प्रणाली के मोर्चे पर यह एक गंभीर विषय है कि ज्ञान का मंदिर तलाशने वाले बच्चों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ता है। किसी भी क्षेत्र में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और उसके सुचारू संचालन के लिए सुरक्षित मार्ग और आवागमन के बेहतर साधन पहली अनिवार्य शर्त होते हैं। जब रास्ते ही इस तरह जलमग्न और कच्चे हों, तो विद्यार्थियों का हौसला और उनके माता-पिता का धैर्य दोनों ही डगमगाने लगते हैं। इस प्रकार की खबरें यह दर्शाती हैं किताबी ज्ञान के साथ-साथ जमीनी स्तर पर प्रशासनिक और ढांचागत विकास कितना आवश्यक है ताकि बच्चों को अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए ऐसे अमानवीय संघर्ष न करने पड़ें। आने वाले दिनों में यदि संबंधित विभागों द्वारा इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो स्थिति और अधिक बिगड़ सकती है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों की यह उम्मीद है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेगा और जल्द से जल्द इस रास्ते का निर्माण करवाकर बच्चों के लिए सुरक्षित आवागमन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।