स्कूल परिसर में कमर तक भरा पानी
लखीमपुर खीरी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज वर्तमान में जलभराव की भीषण समस्या का सामना कर रहा है। स्कूल के चारों ओर पानी का स्तर कमर तक पहुंच गया है, जिससे शिक्षण संस्थान तक पहुंचना कठिन हो गया है। विद्यार्थियों के लिए विद्यालय परिसर में प्रवेश करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस जल भराव के कारण विद्यालय के भीतर का वातावरण पढ़ाई के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो चुका है। छात्र रोजाना स्कूल आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। भारी मात्रा में जमा यह दूषित पानी न केवल बच्चों की आवाजाही को बाधित कर रहा है, बल्कि स्कूल की दैनिक गतिविधियों को भी ठप कर चुका है। स्थानीय स्तर पर जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। छात्रों ने इस मामले को संज्ञान में लेने के लिए जिलाधिकारी कार्यालय का रुख किया है, क्योंकि पानी के कारण स्कूल की नियमित कक्षाएं भी बाधित हो रही हैं।
बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों में चिंता
फरवरी में आयोजित होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थी अपनी पढ़ाई को लेकर अत्यंत चिंतित हैं। जलभराव के चलते विद्यालय में कक्षाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं, जिसका सीधा असर उनके भविष्य और तैयारी पर पड़ रहा है। छात्रों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर भविष्य के प्रति अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं और तत्काल समाधान की मांग की है। छात्रों की इस समस्या को सुनते हुए मुख्य विकास अधिकारी योगानंद पांडे ने उनसे कार्यालय में वार्ता की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि परिसर और आसपास जमा पानी को जल्द ही इंजन लगवाकर बाहर निकाल दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया है कि पानी पूरी तरह सूखने के बाद रास्ते पर एक ऊंची पुलिया का निर्माण कराया जाएगा। इस पुलिया के बनने से भविष्य में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होने की पूरी संभावना है, जिससे छात्रों को राहत मिलेगी।
स्थायी समाधान के लिए प्रशासनिक आश्वासन
लखीमपुर खीरी के राजकीय इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों ने अपनी पीड़ा प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखी है। उन्होंने मांग की है कि विद्यार्थियों के शैक्षिक भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। मुख्य विकास अधिकारी योगानंद पांडे ने छात्रों की मांगों को स्वीकार करते हुए एक ठोस कार्य योजना का वादा किया है। उन्होंने कहा है कि स्कूल के चारों तरफ जमा पानी को मशीनों के जरिए निकाला जाएगा, जिसके बाद ही सड़क निर्माण का काम शुरू होगा। एक बार जब बाहर का पानी पूरी तरह सूख जाएगा, तो उस रास्ते पर एक ऊंची पुलिया का निर्माण करवाया जाएगा, ताकि बारिश या जलभराव के दौरान भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो। प्रशासनिक स्तर पर मिली इस प्राथमिकता से छात्रों को उम्मीद है कि उनकी पढ़ाई का नुकसान अब और अधिक नहीं होगा और आगामी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में उन्हें कोई बाधा नहीं आएगी।