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शिक्षा ब्रेकिंग

मौलाना सईदुर्रहमान आजमी का निधन: शिक्षा जगत में शोक, अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि

लखनऊ स्थित दारुल उलूम नदवतुल उलमा के प्राचार्य मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी का 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनके निधन से शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है।

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Ankit Yadav
08 अक्ट 2026, 12:40
मौलाना सईदुर्रहमान आजमी का निधन: शिक्षा जगत में शोक, अखिलेश यादव ने दी श्रद्धांजलि

प्रख्यात इस्लामी विद्वान का निधन

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान दारुल उलूम नदवतुल उलमा के प्रमुख मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने बुधवार को अंतिम सांस ली। दोपहर लगभग 3 बजे उनके निधन की दुखद सूचना प्राप्त हुई। वे 94 वर्ष के थे और लंबे समय से इस संस्थान की गतिविधियों से गहराई से जुड़े रहे थे। संस्थान परिसर में उनके निधन की खबर फैलते ही मातम छा गया। मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी का जीवन शिक्षा और धार्मिक सेवा को समर्पित रहा। उन्होंने इसी संस्थान से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में यहीं पर छात्रों को शिक्षित करने का दायित्व निभाया। वे लंबे समय तक इस महत्वपूर्ण संस्थान के प्राचार्य के रूप में कार्यरत रहे। अरबी भाषा और इस्लामी साहित्य के क्षेत्र में उनकी विद्वता के कारण उन्हें व्यापक सम्मान प्राप्त था। उनके निधन से शिक्षा जगत और उनके शिष्यों के बीच एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है।

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष की सांत्वना

मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी के निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने नदवा परिसर पहुंचकर दिवंगत विद्वान के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। अखिलेश यादव ने कहा कि मौलाना का जाना शिक्षा और धार्मिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने मौलाना के जीवन के योगदान को याद करते हुए उनके शिष्यों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। इस बीच, समाजवादी प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने भी मौलाना को एक महान शिक्षक के रूप में याद किया। संस्थान के अन्य लोगों ने बताया कि उनका व्यक्तित्व अत्यंत सौम्य था। नदवा से जुड़े आलम नकवी ने उल्लेख किया कि मौलाना उनके गुरु थे और उन्होंने संस्थान की ख्याति बढ़ाने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। मौलाना ने लगभग 60 वर्षों तक मस्जिद में इमामत की और उनकी मधुर आवाज आज भी लोगों के कानों में गूंजती है।

संस्थान और सामाजिक सौहार्द का योगदान

मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने नदवतुल उलमा की पहचान को केवल राष्ट्रीय स्तर तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे एक नई पहचान दिलाई। उनके कुशल मार्गदर्शन के कारण ही आज देशभर से विद्यार्थी यहां शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। साल 2019 में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें मानद डी-लिट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। संस्थान के छात्र कमाल ने बताया कि मौलाना हमेशा हिंदू-मुस्लिम एकता, मानवता और आपसी भाईचारे के प्रबल समर्थक रहे। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव बनाए रखना भी है। मौलाना का जन्म लखनऊ में ही हुआ था और उन्होंने अपना अधिकांश समय नदवा की उन्नति में बिताया। उनके शिष्यों का मानना है कि मौलाना का आदर्श जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनका जाना इस्लामी शिक्षा और अरबी भाषा के विद्वानों के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।

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