ऑनलाइन समीक्षा बैठक में उठा बड़ा मामला
सोमवार को शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस विशेष बैठक में प्रदेश भर के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों के साथ मंडलीय शिक्षा अधिकारी भी शामिल हुए। महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने इस दौरान सभी शिक्षकों द्वारा पूरे किए जा रहे प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया कि उत्तर प्रदेश के कुल 144000 शिक्षकों ने अभी तक मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आने वाले प्रशिक्षण कोर्स को पूरा नहीं किया है। इस स्थिति को विभाग ने बहुत गंभीरता से लिया है और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर नाराजगी जताई है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की देरी से प्रशासनिक लक्ष्य प्रभावित होते हैं और विभागीय योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन धीमा पड़ जाता है। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सभी कर्मियों को तय समय सीमा के भीतर अपने सभी ऑनलाइन और विभागीय पाठ्यक्रम समय पर पूरे करने होंगे ताकि कामकाज में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे।
नशा मुक्ति बोर्ड और छात्र नामांकन पर सवाल
ऑनलाइन समीक्षा बैठक के दौरान केवल प्रशिक्षण पाठ्यक्रम ही नहीं बल्कि अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी तीखी चर्चा की गई। स्कूलों में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए लगाए जाने वाले नशा मुक्ति जागरूकता बोर्ड की स्थापना की स्थिति की भी गहन समीक्षा की गई। कई विद्यालयों में अभी तक इस तरह के जागरूकता बोर्ड नहीं लगाए जाने की बात सामने आई जिस पर महानिदेशक ने कड़ा ऐतराज जताया। जिन जिलों के विद्यालयों में अभी तक ये बोर्ड स्थापित नहीं किए गए हैं उन सभी संबंधित शिक्षा अधिकारियों से इस मामले में तत्काल जवाब मांगा गया है। इसके अलावा पिछले वर्ष की तुलना में इस चालू वर्ष के दौरान विद्यार्थियों के कुल नामांकन में आई भारी कमी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई। महानिदेशक ने कम नामांकन वाले जिलों के सभी जिम्मेदार शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण तलब किया है। साथ ही उन्हें यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छात्र नामांकन की वर्तमान स्थिति में जल्द से जल्द सुधार लाएं ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ सके।
प्रगति सुधारने के लिए शनिवार को अगली बैठक
शिक्षा विभाग में आई इन तमाम कमियों को दूर करने और प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने के लिए अब आगे की ठोस रणनीति तैयार की जा रही है। संबंधित जिलों के जिन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है उन्हें अपनी कार्यशैली में सुधार लाने के निर्देश दे दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो सके। इस पूरी समीक्षा प्रक्रिया के दौरान सामने आई कमियों और विभिन्न मोर्चों पर हुई प्रगति की दोबारा से विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इसके लिए आने वाले शनिवार को एक बार फिर से सभी संबंधित शिक्षा अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। इस आगामी शनिवार की बैठक में यह परखा जाएगा कि अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में नामांकन बढ़ाने और अन्य निर्देशों का पालन करने में कितनी प्रगति हासिल की है। इस प्रकार की लगातार मॉनिटरिंग से शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है ताकि राज्य के सभी विद्यालयों में शैक्षिक माहौल और प्रशासनिक कसावट को पूरी तरह से दुरुस्त रखा जा सके।