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शिक्षा

ओजोन संरक्षण: कॉलेजों में विश्व ओजोन दिवस पर छात्रों को किया गया जागरूक

विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और ओजोन परत के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया।

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Ankit Yadav
18 सित 2026, 12:24
ओजोन संरक्षण: कॉलेजों में विश्व ओजोन दिवस पर छात्रों को किया गया जागरूक
पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शैक्षणिक संस्थानों में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में विश्व ओजोन दिवस के मौके पर कॉलेजों और परिसरों में कई तरह की गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य केंद्रबिंदु पृथ्वी के सुरक्षा कवच यानी ओजोन परत को बचाने और उसके क्षरण को रोकने के लिए युवाओं को प्रेरित करना था। शिक्षक व विशेषज्ञों ने छात्र-छात्राओं को समझाया कि कैसे आधुनिक जीवनशैली और प्रदूषण के कारण पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, जिसे समय रहते रोकना बेहद आवश्यक है।

छात्रों ने ली पर्यावरण बचाने की शपथ

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न महाविद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं, संगोष्ठियों और रैलियों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ओजोन परत की रक्षा करने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में क्लोरोफ्लूरॉकार्बन (CFC) और अन्य हानिकारक गैसों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ध्रुवीय क्षेत्रों में ओजोन परत में होने वाले बदलाव पूरी मानव जाति के लिए खतरे की घंटी हैं। इस दौरान युवा पीढ़ी को यह भी समझाया गया कि वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाएं, ताकि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ धरती छोड़ी जा सके।

उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में विशेष अभियान

खास तौर पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्थित शिक्षण संस्थानों में इस दिन को विशेष रूप से मनाया गया। लखनऊ और आसपास के शैक्षणिक केंद्रों में भी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों को पौधे लगाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित किया गया। प्राध्यापकों ने इस बात पर जोर दिया किताबी ज्ञान के अलावा व्यावहारिक रूप से भी पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी बनती है। स्थानीय स्तर पर ऐसे आयोजनों से युवाओं के भीतर प्रकृति के प्रति प्रेम और उसकी रक्षा करने का भाव जागृत होता है, जो लंबे समय में एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है। भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के जागरूकता अभियान केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें निरंतर जारी रखने की आवश्यकता है। महाविद्यालयों के प्रबंधन ने यह भी घोषणा की कि आने वाले महीनों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियों और सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ा जा सके। कार्यक्रम के अंत में सभी छात्रों ने मिलकर परिसर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को एक नई दिशा मिल सके।
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