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पर्यावरण संरक्षण पहल: स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने आयोजित किया ठोस और ई-वेस्ट प्रबंधन पर राष्ट्रीय वेबिनार
देशभर के शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने ठोस कचरा और ई-वेस्ट प्रबंधन पर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया है।
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Ankit Yadav
17 सित 2026, 13:34
पर्यावरण सुरक्षा और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा हाल ही में एक राष्ट्रीय वेबिनार का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ठोस कचरे यानी सॉलिड वेस्ट और इलेक्ट्रॉनिक कचरे यानी ई-वेस्ट के बढ़ते खतरे से निपटना और इसके वैज्ञानिक प्रबंधन के प्रति जागरूकता फैलाना था। आधुनिक समय में जिस तेजी से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और प्लास्टिक का उपयोग बढ़ रहा है, उससे उत्पन्न होने वाला कचरा हमारे पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर से ही बच्चों और शिक्षकों को इस बारे में शिक्षित करना बेहद आवश्यक हो गया है ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बन सकें।
कचरा प्रबंधन की बढ़ती जरूरत
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सहित देश भर के विभिन्न राज्यों के स्कूलों में कचरा प्रबंधन को लेकर एक नई जागरूकता देखने को मिल रही है। इस वेबिनार के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि किस प्रकार पारंपरिक कूड़े के साथ-साथ पुराने मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले खतरनाक पदार्थों को सुरक्षित तरीके से ठिकाने लगाया जाए। उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्य में, जहां शैक्षिक संस्थानों का दायरा बहुत बड़ा है, इस तरह के अभियानों का प्रभाव दूरगामी होता है। लखनऊ के कई विद्यालयों में भी इस दिशा में छात्र-छात्राओं को रीसाइक्लिंग और कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने के तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं, ताकि वे व्यावहारिक रूप से इन आदतों को अपने जीवन में अपना सकें।
वेबिनार में देश भर से जुड़े शिक्षकों, शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे स्कूली पाठ्यक्रम में पर्यावरण अध्ययन को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि बच्चे किताबी ज्ञान के अलावा वास्तविक जीवन में भी स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के महत्व को समझ सकें। ई-वेस्ट आज के समय में सबसे तेजी से बढ़ने वाला खतरनाक कचरा है, जिसमें लेड, मर्करी और कैडमियम जैसे विषैले तत्व होते हैं। यदि इनका सही ढंग से निपटान न किया जाए, तो यह मिट्टी और भूजल को दूषित कर सकता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही खतरनाक है।
आने वाले दिनों में इस प्रकार के राष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से देश के हर कोने तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाने की योजना है। शिक्षा विभाग का यह प्रयास न केवल विद्यालयों को स्वच्छ और हरित बनाने में मदद करेगा, बल्कि छात्रों के माध्यम से उनके परिवारों और समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा। लखनऊ और अन्य प्रमुख शहरों के शैक्षणिक संस्थानों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस वेबिनार में बताए गए दिशा-निर्देशों को जमीन पर उतारेंगे और अपने परिसरों में कचरा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करेंगे।