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शिक्षा

सकारात्मक बदलाव: राष्ट्रीय शिक्षा नीति से विद्यार्थियों पर हो रहा है अनुकूल असर, धर्मेंद्र प्रधान का बयान

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम श्री एपी मॉडल स्कूल के अपने दौरे के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर महत्वपूर्ण बात कही है। उनके अनुसार यह नीति देश के विद्यार्थियों के जीवन और उनकी पठन-पाठन की प्रक्रिया में सकारात्मक सुधार लेकर आ रही है। इस दौरान स्कूल के माहौल और बच्चों की प्रगति की समीक्षा भी की गई।

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Ankit Yadav
25 सित 2026, 11:39
सकारात्मक बदलाव: राष्ट्रीय शिक्षा नीति से विद्यार्थियों पर हो रहा है अनुकूल असर, धर्मेंद्र प्रधान का बयान

स्कूल दौरे पर केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान देश के शिक्षण संस्थानों में लगातार हो रहे बदलावों के बीच केंद्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा का कार्य तेजी से चल रहा है। इसी सिलसिले में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम श्री एपी मॉडल स्कूल का दौरा किया और वहां की शिक्षण व्यवस्था का प्रत्यक्ष जायजा लिया। इस विशेष दौरे के दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश भर के विद्यालयों में लागू की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अब धरातल पर सार्थक परिणाम देने लगी है। मंत्री महोदय ने बताया कि इस नीति के आने के बाद से छात्र-छात्राओं के सीखने के तौर-तरकों और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों में एक स्पष्ट और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। इस दौरान स्कूल के शिक्षकों, बच्चों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भी पठन-पाठन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की गई ताकि यह समझा जा सके कि स्कूली बच्चों को आधुनिक शैक्षणिक माहौल का कितना लाभ मिल रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में व्यापक बदलाव की रूपरेखा भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के उद्देश्य से लाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य लक्ष्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। इस नीति के तहत पारंपरिक रटने की पद्धति को छोड़कर तार्किक सोच, कौशल विकास और प्रायोगिक ज्ञान पर अधिक जोर दिया जा रहा है। पीएम श्री जैसे विशेष विद्यालय इस बात के जीवंत उदाहरण हैं कि किस प्रकार आधुनिक बुनियादी ढांचे और उन्नत शिक्षण तकनीकों को एक साथ जोड़कर छात्रों के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया जा रहा है। ऐसे दौरों और समीक्षा बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जो नीतियां कागजों पर बनाई जाती हैं, उनका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर पूरी पारदर्शिता और प्रभावशीलता के साथ हो रहा है या नहीं। शिक्षकों को भी इस नई प्रणाली के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे आधुनिक कक्षाओं की बदलती जरूरतों को भली-भांति समझ सकें और विद्यार्थियों को उनकी रूचि के अनुसार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें।

आगामी सुधार और छात्रों के भविष्य पर असर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सकारात्मक प्रभावों के सामने आने से देश के शैक्षणिक भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद जगी है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब छात्र शुरुआती दौर से ही प्रायोगिक शिक्षा और कौशल आधारित ज्ञान से जुड़ते हैं, तो उच्च शिक्षा और पेशेवर जीवन में उनका प्रदर्शन बेहतर हो जाता है। इस प्रकार की नीतियों के निरंतर और प्रभावी क्रियान्वयन से देश के दूर-दराज के इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों को भी महानगरों के छात्रों के समान अवसर मिल सकेंगे। सरकार और संबंधित विभाग इस बात के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आते हैं कि आने वाले दिनों में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि प्रत्येक छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो सके। इस दौरे और उसके दौरान सामने आए निष्कर्षों से यह भी स्पष्ट होता है कि देश का शिक्षा तंत्र धीरे-धीरे वैश्विक मानकों के अनुरूप ढल रहा है, जिससे आने वाली पीढ़ियां भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक आत्मविश्वास और तैयारी के साथ तैयार हो सकेंगी।

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