सारनाथ संस्थान में राजभाषा सप्ताह का समापन
वाराणसी शहर के अंतर्गत आने वाले सारनाथ इलाके में स्थित केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के परिसर में राजभाषा सप्ताह का आयोजन संपन्न हुआ। इस विशेष शैक्षिक और सांस्कृतिक सप्ताह के पूरे होने पर संस्थान की राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तरफ से एक पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया था। यह पूरा आयोजन संस्थान के भीतर बने अतिश सभागार में संपन्न हुआ जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, अधिकारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के भीतर हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था। इन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को चुनकर इस अंतिम दिन सम्मानित करने की पूरी रूपरेखा तैयार की गई थी। कार्यक्रम की शुरुआत और संचालन संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बेहद व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।
विजेताओं का सम्मान और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस समापन समारोह की अध्यक्षता संस्थान के कुलपति प्रोफेसर वाङ्छुग दोर्जे नेगी ने पूरी गरिमा के साथ संभाली। कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉक्टर सुनीता चन्द्रा ने उपाध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर आधुनिक कला संग्रहालय मुंबई की निदेशक सुश्री निधि चौधरी ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दी। वहीं दूसरी ओर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वशिष्ठ द्विवेदी अनूप इस विशेष कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए और अपने विचार रखे। सरकारी कामकाज को पूरी तरह से हिंदी में संचालित करने के लिए चलाई जा रही प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आनंद कुमार सिंह और संजय मौर्य ने प्रथम स्थान हासिल किया। इसके अलावा आयोजित की गई निबंध प्रतियोगिता में जिग्मा आलो ने प्रथम स्थान प्राप्त करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इन सभी विजेताओं को कार्यक्रम के दौरान मंच पर आमंत्रित करके सम्मानित किया गया ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हो सकें।
बौद्ध दर्शन और हिंदी भाषा का अनूठा समन्वय
समारोह की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफेसर वाङ्छुग दोर्जे नेगी ने अपने संबोधन के दौरान संस्थान के भीतर बौद्ध दर्शन और हिंदी भाषा के बीच बन रहे सुंदर समन्वय की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि तिब्बती उच्च शिक्षा के इस प्रमुख केंद्र में दोनों भाषाओं और संस्कृतियों का यह मेल शिक्षा के स्तर को और अधिक मजबूत बनाता है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल प्रशासनिक कार्यों में राजभाषा का प्रयोग बढ़ता है बल्कि विद्यार्थियों के भीतर भी अपनी भाषा के प्रति एक नया सम्मान पैदा होता है। समिति द्वारा आयोजित इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं को अपनी रचनात्मक और वैचारिक क्षमता दिखाने का एक बेहतरीन मंच प्राप्त हुआ है। आने वाले समय में संस्थान इस प्रकार के आयोजनों को और अधिक व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना पर काम कर रहा है जिससे हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के विकास को निरंतर गति मिलती रहे।