विश्वविद्यालय परिसर का शैक्षणिक दौरा
रविवार के दिन धर्मा इंटरनेशनल स्कूल में अध्ययन करने वाले ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षाओं के बच्चों ने एक विशेष शैक्षणिक भ्रमण में हिस्सा लिया। भविष्य के मार्गदर्शन और व्यावहारिक शिक्षा प्राप्ति के उद्देश्य से ये सभी विद्यार्थी जॉलीग्रांट स्थित स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय पहुंचे। इस दौरान विद्यार्थियों के साथ विद्यालय के शिक्षक और शिक्षिकाएं भी मौजूद रहीं, जिनमें ज्योति रयाल, रुचि पुरोहित, मनीष नेगी और आशुतोष जैसे नाम शामिल हैं। बच्चों ने इस परिसर में पहुंचकर उच्च शिक्षा के माहौल को करीब से देखा और अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया। शिक्षकों की देखरेख में आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक दुनिया के तौर-तरकों से परिचित कराना था। इस तरह के आयोजनों से स्कूली बच्चों को बड़े शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को समझने का प्रत्यक्ष अवसर मिलता है और वे अपनी आगामी पढ़ाई के लिए बेहतर योजना बना पाते हैं।
विभिन्न प्रयोगशालाओं का किया गया निरीक्षण
भ्रमण के इस क्रम में विद्यार्थियों ने परिसर के भीतर संचालित होने वाली कई महत्वपूर्ण प्रयोगशालाओं और विभागों का गहराई से मुआयना किया। उन्होंने जैव रसायन विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, औषधि विज्ञान, जीव विज्ञान और रसायन विज्ञान की प्रयोगशालाओं के अंदर जाकर वहां की कार्यप्रणाली को बहुत बारीकी से परखा। इन स्थानों पर मौजूद विशेषज्ञों और कर्मियों ने छात्र-छात्राओं को समझाया कि ये प्रयोगशालाएं किस प्रकार काम करती हैं और इनका दैनिक उपयोग किस रूप में होता है। इसके अलावा बच्चों ने होटल प्रबंधन विभाग का भी दौरा किया और वहां की कार्यशैली के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। विज्ञान से जुड़े विभिन्न विषयों की प्रायोगिक गतिविधियों को अपनी आंखों के सामने होते देखना विद्यार्थियों के लिए एक बहुत ही अनूठा और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुआ। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों ने प्रयोगशाला उपकरणों के कामकाज को नोट किया और अपने शिक्षकों से कई सवाल भी पूछे जिनके उन्हें विस्तार से जवाब मिले।
आधुनिक तकनीक और करियर का मार्गदर्शन
प्रयोगशालाओं के भ्रमण के बाद विद्यार्थियों को आज के दौर की आधुनिक तकनीकों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। उन्हें दृश्य प्रभाव तकनीक यानी वीएफएक्स के कामकाज के बारे में बताया गया और आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए इसके बढ़ते इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने समझाया कि कैसे चलचित्र निर्माण, सजीव चित्रण और शिक्षा जैसे तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में इस नई तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ। स्वाति आनंद ने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण छात्र-छात्राओं को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर व्यावहारिक ज्ञान से रूबरू कराते हैं। उनका यह भी मानना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों को आने वाले कल में अपने लिए सही करियर और क्षेत्र चुनने की उचित दिशा मिलती है। विश्वविद्यालय के इस पूरे दौरे ने विद्यार्थियों के मन में तकनीक और विज्ञान के नए आयामों को लेकर गहरी रुचि पैदा कर दी है।