पिछली व्यवस्था पर मुख्यमंत्री का तीखा प्रहार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में राज्य की पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले समय में प्रदेश की व्यवस्था पूरी तरह से बदहाल हो चुकी थी। माताओं का स्वास्थ्य और बेटियों की शिक्षा घोर उपेक्षा तथा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई थी। स्थिति इतनी खराब थी कि राज्यभर में लाखों की संख्या में बेटियां केवल बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने के लिए विवश थीं। इस घोर लापरवाही के कारण समाज का एक बड़ा वर्ग लगातार पिछड़ता जा रहा था। किसी भी स्तर पर जरूरतमंदों की सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार तंत्र सक्रिय नहीं था। मुख्यमंत्री ने इन पुरानी कमियों को रेखांकित करते हुए बताया कि कैसे पिछली सरकारों की उदासीनता ने बेटियों के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया था। संसाधनों की भारी कमी के चलते सामान्य परिवारों की बेटियों को उच्च शिक्षा या सामान्य स्कूली शिक्षा हासिल करने में भयंकर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबी हुई थी जिसके कारण शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें भी आम जनता की पहुंच से कोसों दूर हो चुकी थीं और हर तरफ केवल बदहाली का ही माहौल साफ तौर पर नजर आता था।
पिछले साढ़े नौ वर्षों में किए गए बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार राज्य में पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान डबल इंजन की सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं। सरकार ने सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के साथ-साथ विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से प्राथमिक विद्यालयों की सूरत पूरी तरह से बदल दी गई है। इस विशेष अभियान के परिणाम स्वरूप प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का स्तर पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार बुनियादी सुविधाओं का यह स्तर 36 प्रतिशत से छलांग लगाकर अब 96 प्रतिशत से भी अधिक तक पहुंच चुका है। इसके अलावा बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। कभी जो ड्रॉपआउट रेट 20 प्रतिशत के आसपास हुआ करता था वह अब घटकर 3 प्रतिशत से भी बहुत कम रह गया है। सरकार के इन निरंतर प्रयासों से विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है और अभिभावक भी अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं मिलने से पढ़ाई का माहौल पूरी तरह से सुधर गया है और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अनुभव प्राप्त हो रहा है।
वंचित वर्ग और बालिकाओं के लिए विशेष योजनाएं
सरकार द्वारा समाज के वंचित तबके और श्रमिक वर्ग के परिवारों के लिए विशेष आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है। अटल आवासीय विद्यालयों के माध्यम से इन वर्गों की बेटियों को उच्च कोटि की आवासीय शिक्षा निशुल्क प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में शिक्षा के दायरे को और अधिक विस्तारित किया गया है। इन विद्यालयों में अब कक्षा 12 तक की पढ़ाई की सुविधा को पूरी तरह से बढ़ा दिया गया है ताकि कोई भी बालिका बीच में अपनी पढ़ाई न छोड़े। इन सभी नवाचारों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य की हर एक बेटी अपनी स्कूली शिक्षा को सफलतापूर्वक पूरा कर सके। सरकार की इन कल्याणकारी नीतियों से गरीब और पिछड़े परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में उठाए गए इन सुधारात्मक कदमों से उत्तर प्रदेश की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं के और अधिक सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे जिससे प्रदेश की आधी आबादी का भविष्य सुरक्षित और उज्जवल हो सकेगा। सरकार की इस प्रतिबद्धता से साफ है कि शिक्षा और स्वास्थ्य हमेशा उसकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेंगे।