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विशेष व्याख्यान: गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में प्राचीन भारतीय शिक्षा पर चर्चा
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और सामाजिक उत्तरदायित्व विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया।
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Ankit Yadav
16 सित 2026, 11:42
उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण आयोजन के तहत, गोंडा के प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री कॉलेज में प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित एक विशेष व्याख्यानमाला का सफलतापूर्वक आयोजन संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को हमारी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर और ज्ञान परंपरा से रूबरू कराना था, ताकि वे आधुनिक जीवन में भी अपनी संस्कृति और मूल्यों को याद रख सकें। उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से लखनऊ तथा आसपास के क्षेत्रों में इस तरह के आयोजनों से छात्रों के बीच वैचारिक गहराई बढ़ती है और उन्हें अपने अतीत को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलता है।
प्राचीन शिक्षा और सामाजिक दायित्व
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि किस प्रकार प्राचीन काल में गुरु-शिष्य परंपरा और गुरुकुल व्यवस्था समाज निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। उस दौर की शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों के विकास और व्यक्ति के सामाजिक उत्तरदायित्व को सुदृढ़ करने पर पूरी तरह केंद्रित होती थी। आज के आधुनिक युग में जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे व्याख्यानों के माध्यम से युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया जाता है कि हमारी पुरानी व्यवस्थाएं कितनी वैज्ञानिक और व्यावहारिक थीं, जो समाज में समरसता और संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होती थीं।
कॉलेज परिसर में आयोजित इस सत्र में बड़ी संख्या में शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उपस्थित विद्वानों ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों, दर्शन और विज्ञान के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा की तथा वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया। चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि हमारी पारंपरिक शिक्षा पद्धति ने हमेशा से ही प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने और सामूहिक कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखा है, जो आज के समय में भी बेहद प्रासंगिक है।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रशासन और आयोजकों की ओर से यह विश्वास जताया गया कि भविष्य में भी इस प्रकार के बौद्धिक आयोजनों का सिलसिला लगातार जारी रहेगा। ऐसे आयोजनों से न केवल शिक्षण संस्थानों का माहौल अकादमिक रूप से समृद्ध होता है, बल्कि छात्रों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सरोकारों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित होता है, जिससे वे भविष्य में एक बेहतर और जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज की सेवा कर सकें।