अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़
लखनऊ शहर के सभी प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों पर आज सुबह से ही मरीजों का तांता लगा रहा। लगातार तीन दिन की छुट्टी के कारण आम जनता अपने स्वास्थ्य संबंधी विकारों के लिए डॉक्टर से परामर्श नहीं ले पाई थी। इस अंतराल के बाद जैसे ही चिकित्सालयों के दरवाजे खुले, ओपीडी काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं। पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीजों की भारी उपस्थिति दर्ज की गई। सर्दी, जुकाम और बुखार जैसी मौसमी बीमारियों से ग्रसित लोग अपने परिजनों के साथ सुबह सवेरे ही अस्पताल पहुंच गए थे। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भी अचानक आई इस अत्यधिक भीड़ को संभालना एक चुनौती बन गया। पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण खिड़की तक हर जगह लोगों की लंबी कतारें नजर आईं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छुट्टी के दिनों में ओपीडी बंद रहने के कारण एक साथ कई दिनों का दबाव आज के दिन देखने को मिला है। मरीज अपनी बारी का इंतजार करने के लिए घंटों लाइनों में खड़े रहे। इस स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन ने भी कुछ अतिरिक्त काउंटर खोलने का प्रयास किया ताकि लोगों को जल्द से जल्द राहत मिल सके और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न फैले। अस्पताल परिसर के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर भारी गहमागहमी का माहौल बना रहा।
सर्दी-जुकाम और बुखार के मरीज बढ़े
सामने आए मामलों के अनुसार लखनऊ के अस्पतालों में आने वाले अधिकांश रोगी सर्दी, जुकाम, वायरल फीवर और सामान्य बुखार से पीड़ित हैं। मौसम में आए बदलाव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण इस तरह की बीमारियां तेजी से फैलती हैं। छुट्टी के बाद जब लोग अस्पतालों में पहुंचे तो डॉक्टरों ने पाया कि बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर उन्हें आवश्यक दवाएं लिखीं और एहतियात बरतने की सलाह दी। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि मौसम बदलने पर इस तरह की समस्याओं में इजाफा होना स्वाभाविक है, लेकिन लगातार तीन दिन की छुट्टी ने मरीजों की संख्या को एक साथ बहुत अधिक बढ़ा दिया। ओपीडी में तैनात चिकित्सकों ने एक-एक मरीज की जांच की और उन्हें उचित परामर्श दिया। कई मरीजों ने बताया कि वे पिछले दो दिनों से घर पर ही बीमार थे और छुट्टी खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही अस्पताल खुले, वे तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचे ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके। मौसम जनित इन बीमारियों के बढ़ने से दवाखानों पर भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी और डॉक्टरों ने लोगों को खानपान में सावधानी बरतने तथा शरीर में पानी की कमी न होने देने की सलाह दी है ताकि संक्रमण से बचा जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं का असर
तीन दिन की छुट्टी के बाद अचानक उमड़ी इस भारी भीड़ ने स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की भी परीक्षा ली है। लखनऊ के अस्पतालों में इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए आमतौर पर अतिरिक्त डॉक्टरों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है। मौसमी बीमारियों के इस सीजन में अस्पताल प्रशासन पहले से ही सतर्क रहता है ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जब भी अस्पताल लंबे अवकाश के बाद खुलते हैं, तो इस प्रकार का दबाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि छुट्टियों के दौरान भी आपातकालीन सेवाएं चालू रहती हैं, लेकिन सामान्य ओपीडी बंद होने के कारण मरीज छोटी-मोटी परेशानियों के लिए भी पहले दिन का इंतजार करते हैं। इस वजह से सोमवार या छुट्टी के तुरंत बाद वाले दिन मरीजों का ग्राफ अचानक ऊपर चला जाता है। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि लोगों को मौसमी बदलाव के दौरान अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि शुरुआती लक्षणों पर ही ध्यान दिया जाए तो स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। अस्पताल प्रबंधन आने वाले दिनों में भी ऐसी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए योजना बना रहा है ताकि सभी आने वाले रोगियों को सुगमता से चिकित्सा परामर्श और दवाइयां समय पर उपलब्ध कराई जा सकें।