राजकीय मेडिकल कॉलेज में प्रसव और ऑपरेशन की घटना
लखीमपुर खीरी जिले के उचौलिया क्षेत्र के सुनोरिया गांव के निवासी शहनवाज ने जिला प्रशासन के सामने एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला दर्ज कराया है। उनकी पत्नी माजिया खातून का प्रसव दो सितंबर को राजकीय मेडिकल कॉलेज में हुआ था जहां बच्ची के जन्म के लिए ऑपरेशन किया गया था। पति शहनवाज का आरोप है कि बच्ची के जन्म के दौरान किए गए इस ऑपरेशन के समय चिकित्सा कर्मियों ने भारी लापरवाही बरती। चिकित्सकों ने प्रसव के बाद पेट बंद करते समय असावधानी दिखाते हुए महिला की आंतों में भी टांके लगा दिए। इस तरह की गंभीर मेडिकल लापरवाही से मरीज की शारीरिक स्थिति बहुत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे अत्यधिक कष्ट का सामना करना पड़ा। ऑपरेशन के कुछ ही घंटों के भीतर प्रसूता का पेट बुरी तरह फूलने लगा जिससे परिजनों की चिंता बहुत अधिक बढ़ गई। परिवार के सदस्यों ने तुरंत इस खतरनाक स्थिति की जानकारी वहां मौजूद चिकित्सकों को दी ताकि समय रहते उसका सही उपचार किया जा सके। हालांकि अस्पताल के डॉक्टरों की तरफ से कोई भी उचित या संतोषजनक उपचार पीड़ित महिला को नहीं मिल सका जिससे परिवार की मुश्किलें और अधिक बढ़ती चली गईं। मजबूर होकर परिजनों को अपनी मरीज की जान बचाने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज से बाहर ले जाने का बड़ा फैसला करना पड़ा और वे तुरंत बरेली के लिए रवाना हो गए।
बरेली और लखनऊ के निजी अस्पतालों में दूसरा ऑपरेशन
राजकीय मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों द्वारा सही इलाज न मिलने पर पीड़ित पति शहनवाज अपनी गंभीर रूप से बीमार पत्नी माजिया खातून को लेकर सबसे पहले बरेली पहुंचे। बरेली के निजी अस्पतालों में जब स्थिति संभल नहीं पाई तो परिजनों को मजबूर होकर मरीज को आगे के इलाज के लिए लखनऊ के एक बड़े निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लखनऊ के उस निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीज की जांच करने के बाद तुरंत एक बार फिर से बड़ा ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। इस दूसरे जटिल ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने महिला के पेट का दोबारा निरीक्षण किया और आंतों में गलती से लगाए गए टांके सफलतापूर्वक हटाए। इस पूरी प्रक्रिया में परिवार को भारी मानसिक तनाव के साथ-साथ गंभीर शारीरिक और आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा क्योंकि एक सामान्य प्रसव मामला लापरवाही के कारण इतना बड़ा संकट बन गया। इस मामले में पीड़ित पति ने मेडिकल कॉलेज की महिला चिकित्सक डॉ। शिल्पी सिंह और एक अन्य अज्ञात डॉक्टर पर सीधे तौर पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की लिखित शिकायत सीधे जिलाधिकारी को सौंपी है और दोनों आरोपी चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस बीच जब मीडियाकर्मियों ने इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए आरोपी महिला चिकित्सक डॉ। शिल्पी से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने अपना फोन रिसीव नहीं किया। इस तरह चिकित्सकों की ओर से इस गंभीर आरोप पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है जिससे परिजनों में रोष और अधिक गहराता जा रहा है।
जिलाधिकारी से न्याय की गुहार और भविष्य की कार्रवाई
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित परिवार ने अब जिला प्रशासन से सीधे न्याय की गुहार लगाई है और प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई है। राजकीय मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी संस्थान में इस स्तर की घोर लापरवाही सामने आने से आम जनता और मरीजों के बीच भारी डर तथा असंतोष का माहौल बन गया है। लोग अब सरकारी अस्पतालों में सुरक्षित इलाज कराने को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं और प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। जिलाधिकारी को दिए गए आधिकारिक पत्र में शहनवाज ने अपनी पत्नी के साथ हुई दर्दनाक आपबीती का पूरा विवरण साझा किया है और दोषियों की जवाबदेही तय करने का अनुरोध किया है। इस तरह के मामलों से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान खड़े होते हैं। प्रशासनिक जांच आगे बढ़ने पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या राजकीय मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले में कोई आंतरिक जांच बिठाता है या नहीं। पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिक अब केवल इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जिला प्रशासन कब तक आरोपी चिकित्सकों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई करता है। इस पूरी घटना ने चिकित्सा जगत में बरती जाने वाली सावधानियों और ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर एक बार फिर से बहुत गंभीर बहस छेड़ दी है।