मरीजों की संख्या में तेजी से उछाल
कानपुर जिले में तापमान में बदलाव के साथ ही मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बहुत अधिक बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक महीने के अंतराल में डेंगू के कुल 123 नए मामले सामने आए हैं। इस अवधि से पहले कुल मरीजों की संख्या 114 दर्ज की गई थी जो अब बढ़कर 237 हो चुकी है। उप जिला चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर राजेश्वर सिंह ने इस बात की पुष्टि की है कि इन नए मामलों में सबसे बड़ी संख्या ग्वालटोली और बिल्हौर इलाकों से आ रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा विभाग की विशेष टीमों को इन दोनों क्षेत्रों में तैनात किया गया है। इन टीमों ने घर-घर जाकर पानी की जांच की है और मच्छरों के पनपने के स्रोतों को पूरी तरह से नष्ट करने का कार्य किया है। इसके अलावा इसी एक महीने के समय में मलेरिया के भी 6 नए मरीज पाए गए हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा लगातार इन आंकड़ों पर नजर बनाए हुए है ताकि संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
अस्पतालों की ओपीडी में उमड़ती भीड़
शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में मरीजों का तांता लगा हुआ है। हैलट अस्पताल और उर्सला अस्पताल की बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में रोजाना 500 से अधिक लोग सर्दी जुकाम और बुखार की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। हैलट अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर सौरभ अग्रवाल का कहना है कि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। डॉक्टर सौरभ अग्रवाल ने बताया कि गर्मी कम होने के बाद लोग आमतौर पर घरों में रखे एयर कूलर बंद कर देते हैं। इन कूलरों के अंदर बचा हुआ ठहरा हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल जगह बन जाता है। केवल कूलर ही नहीं बल्कि पुराने टायर खाली बर्तन और घरों में रखे गमलों में इकट्ठा होने वाला पानी भी इस बीमारी को बढ़ावा दे रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों की छतों और आसपास के परिवेश में पानी को बिल्कुल न ठहरने दें। कूलर के पानी को पूरी तरह निकालकर उसकी नियमित सफाई करना बेहद आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण के खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
सावधानी और चिकित्सीय परामर्श की अपील
बढ़ते संक्रमण के इस दौर में डॉक्टरों ने नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की सख्त हिदायत दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार की शिकायत हो तो उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बाजार से बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से दवाइयां खरीदकर खाना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके बजाय मरीजों को तुरंत किसी भी नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर अपनी विधिवत जांच करानी चाहिए। डॉक्टरों की देखरेख और उनकी सलाह के अनुसार ही सही दवा का सेवन करना संक्रमण से उबरने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है। स्वास्थ्य विभाग का यह भी मानना है कि यदि लोग अपने घरों के आसपास सफाई का विशेष ध्यान रखें और पानी जमा न होने दें तो इस बीमारी के प्रकोप को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों और समय पर की गई चिकित्सीय जांच से ही कानपुर में डेंगू के इस बढ़ते खतरे को पूरी तरह से काबू में किया जा सकता है।